सवाई भोज मेला 2027: 7 सितंबर 2027, मंगलवार (भाद्रपद शुक्ल सप्तमी, सवाई भोज, आसींद (भीलवाड़ा))
तारीखें जम्भ भक्ति के पंचांग (सूर्योदय की तिथि) से हैं और हर साल अपने आप अगले साल की हो जाती हैं।
भगवान देवनारायण जी राजस्थान और मध्य प्रदेश में पूजे जाने वाले लोकदेवता हैं, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। गुर्जर समाज में उनकी विशेष आस्था है। उनका जन्म भीलवाड़ा ज़िले की आसींद तहसील में मालासेरी डूंगरी पर माघ शुक्ल सप्तमी को माना जाता है। उनकी कथा देवजी की फड़ में गाई जाती है, जिसे सबसे लंबी फड़ कहा जाता है।
देवनारायण जी: एक नज़र में
| जन्म स्थान | मालासेरी डूंगरी, आसींद, ज़िला भीलवाड़ा |
| जन्म | माघ शुक्ल सप्तमी, विक्रम संवत 1300 (लगभग 1243 ई.) के आसपास |
| पिता और माता | सवाई भोज और साडू माता |
| वंश | नागवंशी गुर्जर, बगड़ावत |
| पत्नी | पीपलदे, धार के राजा जयसिंह देव परमार की पुत्री |
| घोड़ा | लीलागर |
| प्रमुख धाम | सवाई भोज (आसींद), देवमाली (ब्यावर), देवधाम जोधपुरिया (निवाई, टोंक), देव डूंगरी (चित्तौड़गढ़) |
| मुख्य पर्व | देवनारायण जयंती (माघ शुक्ल सप्तमी) और सवाई भोज मेला (भाद्रपद शुक्ल सप्तमी) |
| दूसरे नाम | देवजी, ऊदल जी |
देवनारायण जी की कथा
देवनारायण जी के पिता सवाई भोज बगड़ावत भाइयों में से थे, जिनकी वीरता की कथाएँ बगड़ावत भारत के नाम से गाई जाती हैं। देवनारायण जी के जन्म से पहले ही भिणाय के शासक से युद्ध में उनके पिता और बगड़ावत भाई मारे गए। माता साडू ने बालक देवनारायण को सुरक्षित रखने के लिए कठिनाइयों में पाला।
बड़े होकर देवनारायण जी ने अपने पिता की मृत्यु का बदला लिया और लोगों की रक्षा की। उन्हें गायों का रक्षक और बीमारों को ठीक करने वाला माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने देवमाली में देह त्यागी। कुछ स्रोत उनके देह त्याग की तिथि बैसाख शुक्ल तृतीया बताते हैं।
देवजी की फड़
देवनारायण जी की फड़ कपड़े पर बनी चित्र-कथा है, जिसे गुर्जर भोपे जंतर (एक वाद्य) बजाते हुए रात भर गाकर सुनाते हैं। इसे राजस्थान की सबसे लंबी और सबसे पुरानी फड़ों में गिना जाता है। पाबूजी की फड़ के साथ यह राजस्थान की फड़ कला की पहचान है।
पूजा और परंपराएँ
- देवनारायण जी के मंदिरों में मूर्ति की जगह आमतौर पर ईंटों की पूजा होती है, और नीम की पत्तियाँ चढ़ाई जाती हैं।
- भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को सवाई भोज में बड़ा मेला भरता है।
- कई गुर्जर परिवार भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को दूध नहीं बेचते और उसे पूजा में चढ़ाते हैं।
- देवनारायण जयंती पर मालासेरी डूंगरी और दूसरे धामों में विशेष पूजा होती है।
देवनारायण जयंती और सवाई भोज मेला कब है?
| पर्व या मेला | तारीख | तिथि | स्थान |
|---|---|---|---|
| देवनारायण जयंती | 13 फ़रवरी 2027, शनिवार | माघ शुक्ल सप्तमी | मालासेरी डूंगरी (भीलवाड़ा) |
| देवनारायण जयंती | 3 फ़रवरी 2028, गुरुवार | माघ शुक्ल सप्तमी | मालासेरी डूंगरी (भीलवाड़ा) |
| देवनारायण जयंती | 22 जनवरी 2029, सोमवार | माघ शुक्ल सप्तमी | मालासेरी डूंगरी (भीलवाड़ा) |
| सवाई भोज मेला | 7 सितंबर 2027, मंगलवार | भाद्रपद शुक्ल सप्तमी | सवाई भोज, आसींद (भीलवाड़ा) |
| सवाई भोज मेला | 26 अगस्त 2028, शनिवार | भाद्रपद शुक्ल सप्तमी | सवाई भोज, आसींद (भीलवाड़ा) |
| सवाई भोज मेला | 14 सितंबर 2029, शुक्रवार | भाद्रपद शुक्ल सप्तमी | सवाई भोज, आसींद (भीलवाड़ा) |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
देवनारायण जयंती कब है?
माघ शुक्ल सप्तमी को। इस साल की तारीख ऊपर दी गई है।
देवनारायण जी का जन्म कहाँ हुआ था?
भीलवाड़ा ज़िले की आसींद तहसील में मालासेरी डूंगरी पर।
देवनारायण जी के माता-पिता कौन थे?
पिता सवाई भोज (बगड़ावत) और माता साडू माता।
देवनारायण जी का मुख्य मंदिर कौन सा है?
आसींद (भीलवाड़ा) का सवाई भोज मंदिर सबसे प्रमुख है। देवमाली (ब्यावर), देवधाम जोधपुरिया (टोंक) और देव डूंगरी (चित्तौड़गढ़) भी प्रसिद्ध धाम हैं।
देवनारायण जी के घोड़े का नाम क्या था?
लीलागर।
यह जानकारी लोक परंपरा, इतिहास की पुस्तकों और समाज में प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है। कई बातों पर अलग-अलग स्रोतों में थोड़ा अंतर मिलता है, ऐसी जगह हमने यह साफ़ लिखा है। कोई जानकारी गलत लगे या आप कुछ जोड़ना चाहें, तो हमें बताएँ। जाँच के बाद हम इसे ठीक करेंगे।
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