
अजब है भोलेनाथ ये, दरबार तुम्हारा – भजन (Ajab Hai Bholenath Ye Darbar Tumhara)
अजब है भोलेनाथ ये, दरबार तुम्हारा, दरबार तुम्हारा, भूत प्रेत नित करे

अजब है भोलेनाथ ये, दरबार तुम्हारा, दरबार तुम्हारा, भूत प्रेत नित करे

भोले नाथ का मैं बनजारा, छोड़ दिया मैंने जग सारा, पता बता

छोटी सी मेरी पार्वती, शंकर की पूजा करती थी, निर्जल रहकर निश्छल

किस विधि वंदन करू तिहारो, औघड़दानी त्रिपुरारी बलिहारी – बलिहारी जय महेश

लेके गौरा जी को साथ भोले-भाले भोले नाथ, काशी नगरी से आए

धन धन भोलेनाथ बॉंट दिये, तीन लोक इक पल भर में ।

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ॥ चली कांवड़ियों की टोली, सब

आग बहे तेरी रग में तुझसा कहाँ कोई जग में है वक़्त

बोले बोले रे जयकारा, जो बाबा का बोले, जय बजरंगी बोले, वो

बजरंग बाला बड़ा हो मतवाला, म्हे फेरा थारी माला, लागो हो मनभावना,

सजा है प्यारा दरबार बाबा का, भक्तों ने मिलकर के किया है,

मेरे बालाजी सरकार, के तो रंग निराले, दया द्रष्टि करते सब पर,

मेरी चौखट पे चलके आज, चारों धाम आए है, बजाओ ढोल स्वागत

सूरज चंदा तारे उसके, धरती आसमान, दिन भी उसका रात भी उसकी,

॥श्री बजरंग बाण पाठ॥ ॥ दोहा ॥ निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय

मैंने मन को मंदिर बनाया, ओ गौरी मैया के लाला, तेरी मूरत

गजानन चरण कमल रज दीजे, गजानन चरण कमल रज दीजें ॥ तुम्हरी

आना हो श्री गणेशा, मेरे भी घर में आना, हे गौरीसुत गजानन,

सबसे पहला मनावा, थाने देवा रा सरदार, रणत भवन सु आप पधारो,

आये है गणेश बप्पा, आज मोरे आंगना, आये मोरे आंगना, जी आये