
आज बिरज में होरी रे रसिया: होली भजन (Aaj Biraj Mein Hori Re Rasiya)
आज बिरज में होरी रे रसिया आज बिरज में होरी रे रसिया

आज बिरज में होरी रे रसिया आज बिरज में होरी रे रसिया

मोहिनी मूरत प्यारी, रंगीलो मेरो बनवारी, मोहनी मूरत प्यारी ॥ रत्न जड़े

हो होली खेलत आज युगल जोड़ी होली खेलत आज युगल जोड़ी, होली

मेरी चुनरी में पड़ गयो दाग री, कैसो चटक रंग डारो, श्याम

दोहा: बाबा थारी मोरछड़ी, घूमे करे कमाल । धूम मची खाटू नगर

दीनानाथ मेरी बात, छानी कोणी तेरे से दीनानाथ मेरी बात, छानी कोणी

मैया मैं तेरी पतंग, हवा विच उडदी जावांगी, मैया डोर हाथों छड्डी

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी कहाँ से आयो कुँवर कन्हैया हरी

फाग* खेलन बरसाने आये हैं, नटवर नंद किशोर । फाग खेलन बरसाने

चटक रंग में, मटक रंग में, धनीलाल रंग में, गोपाल रंग में

भोले बाबा तेरी क्या ही बात है, भोले शंकरा तेरी क्या ही

ऐसो चटक मटक सो ठाकुर तीनों लोकन हूँ में नाय ऐसो चटक

रास कुन्जन में ठहरायो, रास मधुबन में ठररायो, सखियाँ जोवे बाँट, साँवरो

मुकुट सिर मोर का, मेरे चित चोर का । दो नैना सरकार

होली खेलन आयो श्याम होली खेलन आयो श्याम, आज याहि* रंग में

भगवान कृष्ण के बचपन का निवास ब्रज क्षेत्र यानी मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन,

होली एक ऐसा रंगबिरंगा त्योहार है, जिसमे हर धर्म के लोग पूरे

कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि, री लीला गुदवाय लो प्यारी । दृगन

॥ श्याम स्तुति ॥ हाथ जोड़ विनती करूं सुणियों चित्त लगाय, दास

“….बोरी मत जाने , वृषभानु की किशोरी छे होरी में तोसो काहु