
सभकेर सुधि अहाँ लै छी हे अम्बे – भजन (Sabker Sudhi Aahan Lai Chhi He Ambe)
सभकेर सुधि अहाँ लै छी हे अम्बे हमरा किए बिसरै छी हे

सभकेर सुधि अहाँ लै छी हे अम्बे हमरा किए बिसरै छी हे

मेरी मैया तेरे दरबार ये, दीवाने आए है, भक्ति में तेरी डूब

अम्बे रानी ने, अपना समझ कर मुझे, अपने दर पे बुलाया, मजा

शेरावाली माँ, आए तेरे नवराते, तेरा दरबार सजा के, तुझको भक्त बुलाते,

शेरावाली के दरबार में, होती है सुनवाई, सारे जग की महारानी ये,

दादी इतनी किरपा करिये, दर ते आवता रवा, मैं तो थारे दरबार

मैया अम्बे मैया, लाल तेरा घबराये हर पल तुझे बुलाये ॥ मैया

मेरी विपदा टाल दो आकर, हे जग जननी माता ॥ तू वरदानी

दरबार हजारो देखे है, पर माँ के दर सा कोई, दरबार नहीं,

कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे, निर्धन के घर भी आ जाना ।

आयी महादेवी अवतार, भवानी मोरे अंगना में ॥ रहे निमंत्रण डार, खेरे

मैं चाहूँ सदा दर तेरे आना, तू यूँ ही बुलाना दातिए, तेरा

म्हारे सर पर है मैया जी रो हाथ, कोई तो म्हारो कई

मैया के चरणों में, झुकता है संसार, तीनों लोक में होती, माँ

बनकर के धूल के कण, चरणों से लिपट जाऊं, तेरे आँचल की

तेरे चरणों में शीश मैं झुकाऊं, तेरे ही गुण गाऊं, ओ माता

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो । पायो जी मैंने राम

माँ ऊँचे पर्वत वाली, करती शेरो की सवारी, अम्बे माँ, घर में

चौकी तेरी माता रानिये, तेरे बच्चो ने कराई है ॥ दोहा –

जब संकट कोई आए, तू ले मैया का नाम, तेरे पुरण होंगे