
शिव स्तुति: आशुतोष शशाँक शेखर (Shiv Stuti: Ashutosh Shashank Shekhar)
आशुतोष शशाँक शेखर, चन्द्र मौली चिदंबरा, कोटि कोटि प्रणाम शम्भू, कोटि नमन

आशुतोष शशाँक शेखर, चन्द्र मौली चिदंबरा, कोटि कोटि प्रणाम शम्भू, कोटि नमन

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय सत्य है ईश्वर, शिव है जीवन,

शीश गंग अर्धंग पार्वती, सदा विराजत कैलासी । नंदी भृंगी नृत्य करत

एक दिन वो भोले भंडारी भजन लिरिक्स के माध्यम से भगवान शिव

मेरी अखियाँ तरस रही, भोले का दीदार पाने को, मैं भगत दीवाना

कावड़िया ले चल गंग की धार ॥ दोहा – भस्म रमाए बैठे

थोड़ा देता है या ज्यादा देता है, हमको तो जो कुछ भी

महाकाल बाबा उज्जैन वाले, जीवन मेरा तेरे हवाले, दर दर भटका पड़

बोलो राम, जय जय राम, बोलो राम जन्म सफल होगा बन्दे, मन

यशोमती मैया से बोले नंदलाला राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला ॥

मेरी फरियाद सुन भोले, तेरे दर आया दीवाना, मन की मुरादें पूरी

भोले शंकर हम भक्तो से, करते कितना प्यार, हमें एक बार बता

ओ शंकर मेरे, कब होंगे दर्शन तेरे, जीवन पथ पर शाम सवेरे,

हे भोले बाबा हे भंडारी, नाम जपूँ तेरा, ओ शम्भू मेरे नाम

झोली भर लो भक्तो, दौलत बरसे भोले के दरबार, झोली भर ल्यो

एक भोली भाली कन्या, पर्वत से भक्तो आई, सिर पे उसके लाल

सबकी भरती है माँ, यहाँ पर झोलियाँ ॥ चढ़के पहाड़ी, भक्तो की

तुम्हारी याद आती है, बताओ क्या करें मोहन, तुम्हारी याद आती हैं,

परदेस जा रहे हो, कैसे जियेंगे हम, कैसे जियेंगे हम कन्हैया, कैसे

लौट के आजा नंद के दुलारे, उम्मीद लगाए, ना जाने मेरो, लाला