ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं,
वन्दे जगत्कारणम् ।
वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं,
वन्दे पशूनां पतिम् ॥
वन्दे सूर्य शशांक वह्नि नयनं,
वन्दे मुकुन्दप्रियम् ।
वन्दे भक्त जनाश्रयं च वरदं,
वन्दे शिवंशंकरम् ॥
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