
शिव भो शंम्भो शिव शम्भो स्वयंभो – मंत्र (Bho Shambho Shiva Shambho Swayambho)
शिव भो शंम्भो शिव शम्भो स्वयंभो भो शम्भो शिव शम्भो स्वयंभो गङ्गाधर
भगवान शिव (भोलेनाथ, महादेव) के भजन, आरती, स्तुति, मंत्र और कथाएँ हिंदी लिरिक्स के साथ।

शिव भो शंम्भो शिव शम्भो स्वयंभो भो शम्भो शिव शम्भो स्वयंभो गङ्गाधर

लंका प्रवेश के समय भगवान श्री राम ने रामेश्वरम में स्वयं शिवलिंग

विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय कणामृताय शशिशेखरधारणाय । कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय

॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान । कहत

गुरु शिव को बना लीजिए, भक्ति से घर सजा लीजिये ॥ कर

नमो नमो जय, नमो शिवाय नमो नमो जय, नमो शिवाय कितने भोले

मेरे भोले बाबा को अनाड़ी मत समझो, अनाड़ी मत समझो, खिलाडी मत

महादेव शंकर हैं जग से निराले, बड़े सीधे साधे बड़े भोले भाले

जो शिव नाम होठों पे चढ़ गयो रे, तो समझो ये जीवन

शिवरात्रि, सावन के सोमवार, सोमवर, सोलह सोमवर, काँवड़, सावन के महिने मे

॥ भाग १ ॥ कल्पतरु पुन्यातामा, प्रेम सुधा शिव नाम हितकारक संजीवनी,

जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी ॥ अजर अमर अज अरूप, सत चित

भभूती रमाये बाबा भोले नाथ आए, भोले नाथ आए बाबा डमरू बजाए,

शिवरात्रि, सावन के सोमवार, सोमवर, सोलह सोमवर, काँवड़, सावन के महिने मे

शंकर तेरी जटा से, बहती है गंग धारा, काली घटा के अंदर,

देवो में सबसे बड़े, मेरे महादेव हैं, सर्पो की गले माल, चंद्रमा

मेरे भोले बाबा जटाधारी शम्भू, हे नीलकंठ त्रिपुरारी हे शम्भू ॥ नंदी

मेरे नाथ केदारा, तेरे नाम का सहारा, तेरे नाम की है जोली,

शिव समान दाता नहीं, है ये देवों के है देव, भक्तों के

महिमा तेरी समझ सका ना, कोई भोले शंकर, कभी तो भोले भंडारी