
माँ रेवा: थारो पानी निर्मल (Maa Rewa: Tharo Pani Nirmal)
नदी को भारत मे माँ का सम्मान दिया गया है, तथा नर्मदा
माँ दुर्गा, अम्बे, काली, पार्वती और सभी देवी माँ के भजन, आरती, चालीसा और स्तोत्र।

नदी को भारत मे माँ का सम्मान दिया गया है, तथा नर्मदा

परिवार मेरा मैया, करता है तेरी भक्ति, भक्ति से सदा मिलती, तेरे

तेरे पावन माँ नवरात्रों में, ज्योत तेरी जगाए हुए हैं, जबसे लागी

मेरी मैया जी कर दो नज़र, ज़िन्दगी मेरी जाए संवर, मेरी मईया

माँ गौरी के लाल गजानन, आज आओ पधारो मेरे आँगन, गौरी शंकर

माँ तेरे लाल बुलाए आजा, सुनले भक्तो की सदाए आजा, माँ तेरे

माँ वेदों ने जो तेरी महिमा कही है, माँ वेदों ने जो

धूम मची है धूम माँ के दर, धूम मची है धूम ॥

उंचिया पहाड़ा वाली माँ, हो अम्बे रानी, थोड़ी सी मैहर कर दे,

दातिये कर छावां, अम्मीये तेरे द्वारे विच्चों, जोतां दे लिशकारे विच्चों, मेहराँ

गौरा जी को भोले का, योगी रूप सुहाया है, इसीलिए तप करके,

भोलेनाथ की दीवानी, गौरा रानी लागे, गौरा रानी लागे, शिव संग में

शीश गंग अर्धंग पार्वती, सदा विराजत कैलासी । नंदी भृंगी नृत्य करत

यशोमती मैया से बोले नंदलाला राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला ॥

सबकी भरती है माँ, यहाँ पर झोलियाँ ॥ चढ़के पहाड़ी, भक्तो की

मेरे राघव जी उतरेंगे पार, गंगा मैया धीरे बहो, मैया धीरे बहो,

काली कमली वाला मेरा यार है, मेरे मन का मोहन तु दिलदार

मेरी चुनरी में पड़ गयो दाग री, कैसो चटक रंग डारो, श्याम

मैया मैं तेरी पतंग, हवा विच उडदी जावांगी, मैया डोर हाथों छड्डी

जयपुर की चुनरिया, मैं लाई शेरावालिये, जयपुर की चुनरिया, मैं लाई शेरावालिये