
पर्वत से उतर कर माँ, मेरे घर आ जाना: भजन (Parvat Se Utar Kar Maa Mere Ghar Aa Jana)
पर्वत से उतर कर माँ, मेरे घर आ जाना, मैं भी भगत
माँ दुर्गा, अम्बे, काली, पार्वती और सभी देवी माँ के भजन, आरती, चालीसा और स्तोत्र।

पर्वत से उतर कर माँ, मेरे घर आ जाना, मैं भी भगत

सच्चे मन से माँ की, ज्योत तुम जगाओ, बिन मांगे सारे फल

शेरावाली की नज़र जिसपे पड़ने लगी, जिसपे पड़ने लगी, देखो तक़दीर उसकी

जगदम्बे भवानी मैया, तेरा त्रिभुवन में छाया राज है, सोहे वेश कसुमल

मेरी आस तू है माँ, विश्वास तू है माँ, मेरी हर ख़ुशी

सावन की बरसे बदरिया सावन की बरसे बदरिया, माँ की भीगी चुनरीया,

मैया जी के चरणों मे ठिकाना चाहिए। बेटा जो बुलाए माँ को

ओ मैया तेरी रहमतों ने, ये करिश्मा किया, छोटी पड़ गई झोली,

विसर्जन को चली रे, चली रे मोरी मैया, विदाई से आज मोरी,

माँ की लाल रे चुनरिया, देखो लहर लहर लहराए, माँ की नाक

हाँ माँ हो तो ऐसी हो ऐसी हो ऐसी हो काली मैय्यां

जगदम्बे भवानी माँ, तुम कुलदेवी मेरी, मैं तुम्हें मनाऊं माँ, करो भूल

छोड़ के सारे जग को आये, तेरी शरण में माँ, अपनी शरण

मैया तुमको मनावे तेरे भक्त रे, तेरे भक्त रे, ओ मेरी मैया

मैया को अपने घर बुलाएंगे, सारे मिलकर माँ का लाड़ लड़ाएंगे ॥

मेरा तो बस एक सहारा, राम ए माँ, लागे सबते प्यारा, मेरा

तेरी छाया मे, तेरे चरणों मे, मगन हो बैठूं, तेरे भक्तो मे॥

करवा चौथ, नवदुर्गा, दुर्गा पूजा, नवरात्रि, नवरात्रे, नवरात्रि, माता की चौकी, देवी

जिनका मैया जी के चरणों से संबंध हो गया । उनके घर

जाना है मुझे माँ के दर पे, सुनो बाग के माली, मेरी