
विसर्जन को चलीं रे, चली रे मोरी मैया: भजन (Visarjan Ko Chali Re Chali Mori Maiya)
विसर्जन को चली रे, चली रे मोरी मैया, विदाई से आज मोरी,

विसर्जन को चली रे, चली रे मोरी मैया, विदाई से आज मोरी,

माँ की लाल रे चुनरिया, देखो लहर लहर लहराए, माँ की नाक

धरती गगन में होती है, तेरी जय जयकार ॥ श्लोक – सर्व

हाँ माँ हो तो ऐसी हो ऐसी हो ऐसी हो काली मैय्यां

जगदम्बे भवानी माँ, तुम कुलदेवी मेरी, मैं तुम्हें मनाऊं माँ, करो भूल

छोड़ के सारे जग को आये, तेरी शरण में माँ, अपनी शरण

मैया तुमको मनावे तेरे भक्त रे, तेरे भक्त रे, ओ मेरी मैया

मुझे रंग दे ओ रंगरेज, चुनरिया सतरंगी, मुझे रंग दे ओ रंगरेज,

मैया को अपने घर बुलाएंगे, सारे मिलकर माँ का लाड़ लड़ाएंगे ॥

सीता विवाह के समय माता सीता के द्वारा गया गौरी पूजा भजन

हम वन के वासी, नगर जगाने आए ॥ दोहा – वन वन

मेरा तो बस एक सहारा, राम ए माँ, लागे सबते प्यारा, मेरा

राम नाम का प्याला प्यारे, पि ले सुबहो शाम, राम राम राम,

ऊधम ऐसा मचा ब्रज में, सब केसर रंग उमंगन सींचें चौपद छज्जन

तेरी छाया मे, तेरे चरणों मे, मगन हो बैठूं, तेरे भक्तो मे॥

करवा चौथ, नवदुर्गा, दुर्गा पूजा, नवरात्रि, नवरात्रे, नवरात्रि, माता की चौकी, देवी

जिनका मैया जी के चरणों से संबंध हो गया । उनके घर

लेके पूजा की थाली ज्योत मन की जगा ली तेरी आरती उतारूँ

जाना है मुझे माँ के दर पे, सुनो बाग के माली, मेरी

सर को झुकालो, शेरावाली को मानलो, चलो दर्शन पालो चल के ।