
जब जब हम दादी का, मंगल पाठ करते हैं: भजन (Jab Jab Hum Dadiji Ka Mangalpath Karte Hai)
जब जब हम दादी का, मंगल पाठ करते हैं, साछात धनयाणी से,

जब जब हम दादी का, मंगल पाठ करते हैं, साछात धनयाणी से,

मैया जी मेरे हाथ को, अब थाम लीजिये ॥ दोहा – रोता

म्हापे जद भी मुसीबत, कोई आवन लागे, कोई आवन लागे, म्हारे सिर

मेरी सुनकर करुण पुकार, भवानी आएगी, आएगी माँ आएगी, अपना मुझे बनाएगी,

पर्वत से उतर कर माँ, मेरे घर आ जाना, मैं भी भगत

सच्चे मन से माँ की, ज्योत तुम जगाओ, बिन मांगे सारे फल

शेरावाली की नज़र जिसपे पड़ने लगी, जिसपे पड़ने लगी, देखो तक़दीर उसकी

जगदम्बे भवानी मैया, तेरा त्रिभुवन में छाया राज है, सोहे वेश कसुमल

मेरी आस तू है माँ, विश्वास तू है माँ, मेरी हर ख़ुशी

सावन की बरसे बदरिया सावन की बरसे बदरिया, माँ की भीगी चुनरीया,

मैया जी के चरणों मे ठिकाना चाहिए। बेटा जो बुलाए माँ को

तुम्ही मेरी नइया, किनारा तुम्ही हो, मेरी जिंदगी का, सहारा तुम्ही हो,

भजो रे भैया, राम गोविंद हरि, राम गोविंद हरि, भजो रे भईया,

चली चली रे, चली चली रे, चली चली रे पालकी श्री राम

श्री राम जी का मंदिर बनाएंगे, भगवा ध्वज लहरायेंगे, मंदिर जब ये

जन्मे अवध में, दशरथ के ललना, बाजे शंख और नगाड़े, कौशल्या अंगना,

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय, भस्माङ्गरागाय महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै नकाराय नमः शिवाय

गल मोत्यां को हार, सिर चुनड़ चमकदार, थे कर सोलह श्रृंगार, माँ

ओ मैया तेरी रहमतों ने, ये करिश्मा किया, छोटी पड़ गई झोली,

लूट रहा भंडार है, मैया जी का द्वार है, मौका बड़ा ही