
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो – भजन (Maiya Mori Mai Nahi Makhan Khayo)
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो । भोर भयो गैयन के पाछे,

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो । भोर भयो गैयन के पाछे,

तेरी मुरली की मैं हूँ गुलाम, मेरे अलबेले श्याम । अलबेले श्याम

मोहन से दिल क्यूँ लगाया है, ये मैं जानू या वो जाने,

वृन्दावन धाम अपार, जपे जा राधे राधे, राधे सब वेदन को सार,

श्याम खाटू वाले से, मेरी पहचान हो गई, मुश्किल बड़ी थी मेरी,

एक नज़र बस एक नज़र, हम पे मोहन वार दे, ज़िन्दगी की

कृष्ण कन्हैया बंसी बजैया, नंदलाला घनश्याम रे, गोवर्धन गिरधारी कान्हा, तेरे कितने

जग में सुन्दर हैं दो नाम, चाहे कृष्ण कहो या राम ।

सबके दिल में, श्याम की तस्वीर है, कोई धन्ना सेठ, कोई फकीर

हरी नाम सुमिर सुखधाम, हरी नाम सुमिर सुखधाम जगत में जीवन दो

मीरा दीवानी हो गयी रे, मीरा दीवानी हो गयी । मीरा मस्तानी

हे मुरलीधर छलिया मोहन, हम भी तुमको दिल दे बैठे, गम पहले

कृष्ण जिनका नाम है, गोकुल जिनका धाम है, ऐसे श्री भगवान को,

बांके बिहारी कृष्ण मुरारी मेरे बारी कहाँ छुपे, दर्शन दीजो शरण में

ना जी भर के देखा, ना कुछ बात की, बड़ी आरजू थी,

मुझे चरणों से लगाले, मेरे श्याम मुरली वाले । मेरी स्वास-स्वास में

तेरे चरण कमल में श्याम, लिपट जाऊ राज बनके । लिपट जाऊ

यशोमती नन्दन बृजबर नागर, गोकुल रंजन कान्हा, गोपी परण धन मदन मनोहर,

ब्रजराज ब्रजबिहारी, गोपाल बंसीवारे इतनी विनय हमारी, वृन्दा-विपिन बसा ले कितने दरों

मैं तो अपने श्याम की, दीवानी बन जाउंगी, दीवानी बन जाउंगी, मस्तानी