
राधा के मन में, बस गए श्याम बिहारी – भजन (Radha Ke Man Mai Bas Gaye Kunj Bihari)
श्याम रंग में रंग गई राधा, भूली सुध-बुध सारी रे, राधा के

श्याम रंग में रंग गई राधा, भूली सुध-बुध सारी रे, राधा के

बंसी बजा के मेरी निंदिया चुराई, लाडला कन्हैया मेरा कृष्ण कन्हाई, कुञ्ज

मनमोहन तुझे रिझाऊं, तुझे नित नए लाड़ लड़ाऊं, बसा के तुझे नैनन

था बिन दीनानाथ, आंगली कुण पकड़सी जी, कुण पकड़सी जी सांवरा, कुण

तू ही कन्हैया तू ही लखदातार है, लखदातार है तू लीले का

गोविन्द जय-जय, गोपाल जय-जय । राधा-रमण हरि, गोविन्द जय-जय ॥ १ ॥

मेरो छोटो सो लड्डू गोपाल, सखी री बड़ो प्यारो है। मेरो छोटो

प्रभुजी मोरे/मेरे अवगुण चित ना धरो, समदर्शी प्रभु नाम तिहारो, चाहो तो

हे करुणा मयी राधे, मुझे बस तेरा सहारा है, मुझे बस तेरा

मन की तरंग मार लो, बस हो गया भजन। आदत बुरी संवार

नंद रानी तेरो लाला जबर भयो रे/री महारानी तेरो लाला जबर भयो

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी, अँखियाँ प्यासी रे । मन मंदिर की

मेरे मिथिला देश में, आओ दूल्हा भेष । ताते यही उपासना, चाहिए

हम शरण तेरी आए है, झुकाने को ये सर, कर दो उद्धार

अगर प्यार तेरे से पाया ना होता, तुझे श्याम अपना बनाया ना

चलो मन वृन्दावन की ओर, प्रेम का रस जहाँ छलके है, कृष्णा

तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे, तू लगे दूल्हा सा दिलदार सांवरे ।

भजहु रे मन श्री नंद नंदन अभय-चरणार्विन्द रे दुर्लभ मानव-जन्म सत-संगे तारो

हमारे दो ही रिश्तेदार, एक हमारी राधा रानी, दूजे बांके बिहारी सरकार।

घनश्याम तेरी बंसी, पागल कर जाती है, मुस्कान तेरी मोहन, घायल कर