
नंदभवन में उड़ रही धूल – भजन (Nand Bhavan Me Ud Rahi Dhul)
नंदभवन में उड़ रही धूल, धूल मोहे प्यारी लगे ॥ उड़ उड़

नंदभवन में उड़ रही धूल, धूल मोहे प्यारी लगे ॥ उड़ उड़

पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे, हमारा कुछ ना बिगड़ेगा,

राधे झूलन पधारो झुकी आए बदरा, झुक आये बदरा झुकी आये बदरा,

आई बागों में बहार, झूला झूले राधा प्यारी । झूले राधा प्यारी,

झूला पड्यो है कदम्ब की डार, झुलावे ब्रज नारी, ब्रज नारी रे

मेरी रसना से प्रभु तेरा नाम निकले, हर घड़ी हर पल राम

भगवान तुम्हारे चरणों में, मैं तुम्हे रिझाने आया हूँ, वाणी मैं तनिक

छोटी सी किशोरी, मोरे अंगना मे डोले रे छोटी सी किशोरी, मोरे

जमुना के तट पर, मारी नजरिया ऐसी सांवरिया ने, घायल हो गई

कभी भूलू ना कभी भूलू ना कभी भूलू ना याद तुम्हारी रटू

अगर श्याम सुन्दर का सहारा ना होता, तो दुनियाँ में कोई हमारा

तारा है सारा जमाना, श्याम हम को भी तारो । हम को

संसार के लोगों से आशा ना किया करना, जब कोई ना हो

महल को देख डरे सुदामा का रे भई मोरी राम मड़ईया कहाँ

श्री राम नवमी, विजय दशमी, सुंदरकांड, रामचरितमानस कथा और अखंड रामायण के

जन्माष्टमी, गरवा और नवजात शिशु के जन्म बधाई की खुशी में यह

जेल में प्रकटे कृष्ण कन्हैया, सबको बहुत बधाई है, बहुत बधाई है,

मेरो लाला झूले पालना, नित होले झोटा दीजो नित होले झोटा दीजो,

बधैया बाजे आँगने में, बधैया बाजे आँगने मे ॥ चंद्रमुखी मृगनयनी अवध

यह तो प्रेम की बात है उधो, बंदगी तेरे बस की नहीं