मार्गशीर्ष (अगहन) महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहते हैं। “उत्पन्ना” का अर्थ है “जो उत्पन्न हुई”। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु के शरीर से देवी एकादशी प्रकट हुई थीं, इसलिए इसे एकादशी व्रत का जन्मदिन माना जाता है। जो लोग हर महीने एकादशी का व्रत शुरू करना चाहते हैं, वे परंपरा से इसी दिन से शुरुआत करते हैं। गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के अमांत पंचांग में यही दिन कार्तिक कृष्ण एकादशी कहलाता है। नीचे दी गई तारीखें और समय हर साल अपने आप अगले साल के अनुसार बदल जाते हैं।
उत्पन्ना एकादशी 2026: तारीख और समय
| एकादशी | उत्पन्ना एकादशी, मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी |
| व्रत की तारीख | 4 दिसंबर 2026, शुक्रवार |
| एकादशी तिथि शुरू | 3 दिसंबर, रात 11:04 |
| एकादशी तिथि समाप्त | 4 दिसंबर, रात 11:45 |
| पारण | 5 दिसंबर, सुबह 6:58 से 9:03 |
| सूर्योदय और सूर्यास्त (4 दिसंबर) | सुबह 6:58 और शाम 5:24 |
| विक्रम संवत | 2083 |
समय नई दिल्ली के अनुसार है और जम्भ भक्ति की अपनी खगोलीय गणना (लाहिड़ी अयनांश) से निकाला गया है। एकादशी तिथि के शुरू और खत्म होने का समय पूरे भारत में एक ही रहता है, पर पारण का समय सूर्योदय पर निर्भर करता है, इसलिए दूसरे शहरों में यह कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। अपने शहर का समय आज का पंचांग में देखें।
उत्पन्ना एकादशी का महत्व
- एकादशी देवी का प्राकट्य: कथा के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु की शक्ति देवी एकादशी के रूप में प्रकट हुई और उन्होंने मुर नाम के दैत्य का अंत किया।
- एकादशी व्रत की शुरुआत: साल भर की एकादशी का संकल्प लेने के लिए यह सबसे शुभ दिन माना जाता है।
- पापों से मुक्ति: भगवान विष्णु ने देवी एकादशी को वरदान दिया था कि जो इस दिन श्रद्धा से व्रत करेगा, उसके पाप दूर होंगे और उसे विष्णु लोक मिलेगा।
- अगहन का पवित्र महीना: भगवद् गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ, इसलिए इस महीने की एकादशी का महत्व और बढ़ जाता है।
एकादशी का व्रत शुरू करना है? ऐसे करें
अगर आप पहली बार एकादशी का व्रत शुरू कर रहे हैं, तो उत्पन्ना एकादशी से अच्छा दिन नहीं है। शुरुआत इन बातों से करें:
- संकल्प लें: एकादशी की सुबह भगवान विष्णु के सामने हाथ में जल लेकर तय करें कि आप कितनी एकादशी (साल भर की या कुछ महीने) का व्रत करेंगे।
- व्रत का तरीका चुनें: निर्जल (बिना पानी), जल वाला, फलाहार या एक समय फलाहार। अपनी सेहत के हिसाब से ही चुनें। शुरुआत फलाहार से करना ठीक रहता है।
- दशमी से तैयारी: एकादशी से एक दिन पहले शाम को सादा भोजन करें और रात में अनाज न खाएँ।
- पारण ज़रूर सही समय पर करें: व्रत द्वादशी तिथि में पारण के समय पर ही खोलें। पारण न करने से व्रत अधूरा माना जाता है।
- हर महीने दो एकादशी: साल में आमतौर पर 24 एकादशी आती हैं, और अधिक मास वाले साल में 26। हर एकादशी की तारीख एकादशी कब है पेज पर देख सकते हैं।
उत्पन्ना एकादशी पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ, हो सके तो पीले कपड़े पहनें।
- घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएँ और व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु को पीले फूल, चंदन, अक्षत, फल, धूप और तुलसी दल चढ़ाएँ। तुलसी एक दिन पहले तोड़कर रख लें, क्योंकि एकादशी पर तुलसी नहीं तोड़ी जाती।
- देवी एकादशी का ध्यान करें और एकादशी माता की आरती गाएँ।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें, विष्णु चालीसा या शान्ताकारं भुजगशयनं (विष्णु स्तुति) का पाठ करें और नीचे दी गई व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- अंत में ॐ जय जगदीश हरे आरती करें। रात को भजन-कीर्तन करें और अगले दिन पारण के समय व्रत खोलें।
व्रत के नियम: क्या खाएँ, क्या न खाएँ
- एकादशी पर चावल, गेहूँ, दाल और कोई भी अनाज नहीं खाया जाता।
- फलाहार में फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, आलू, शकरकंद और सेंधा नमक ले सकते हैं।
- लहसुन-प्याज़ और तामसिक भोजन से दूर रहें। दिन में सोने से बचें और मन को भगवान के नाम में लगाएँ।
- किसी की निंदा, झूठ और क्रोध से बचें। व्रत सिर्फ़ भूखे रहना नहीं, मन को शांत रखना भी है।
- बुज़ुर्ग, बीमार, बच्चे और गर्भवती महिलाएँ फलाहार या एक समय भोजन वाला व्रत रखें।
पारण कैसे और कब करें?
पारण यानी व्रत खोलना। एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में, हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई हिस्सा) खत्म होने के बाद पारण किया जाता है। इस बार हरि वासर 5 दिसंबर, सुबह 6:02 तक है। पारण 5 दिसंबर, सुबह 6:58 से 9:03 के बीच करें।
पारण से पहले भगवान को भोग लगाएँ, तुलसी दल और जल लें, फिर सात्विक भोजन करें। ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन और अन्न-वस्त्र का दान शुभ माना जाता है।
उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा
यह कथा भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई थी। सतयुग में मुर नाम का एक बहुत बलवान दैत्य था। उसने इंद्र समेत सभी देवताओं को हराकर स्वर्ग से निकाल दिया। दुखी देवता पहले भगवान शिव के पास गए। शिव जी ने उन्हें भगवान विष्णु की शरण में जाने को कहा।
देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु मुर से युद्ध करने गए। उन्होंने दैत्यों की सेना को तो हरा दिया, पर मुर से उनका युद्ध बहुत लंबे समय तक चलता रहा। थककर भगवान विष्णु बद्रिकाश्रम की एक गुफा में विश्राम करने चले गए और वहाँ योगनिद्रा में सो गए।
मुर उनका पीछा करते हुए गुफा तक पहुँच गया। जैसे ही उसने सोए हुए भगवान पर वार करना चाहा, भगवान विष्णु के शरीर से एक तेजस्वी कन्या प्रकट हुई। उस कन्या ने मुर को युद्ध के लिए ललकारा और उसका अंत कर दिया।
जब भगवान विष्णु जागे, तो मुर को मरा देखकर हैरान हुए। कन्या ने सारी बात बताई। भगवान बहुत प्रसन्न हुए और बोले, “तुम मेरे शरीर से एकादशी तिथि को उत्पन्न हुई हो, इसलिए तुम्हारा नाम एकादशी होगा। जो भी इस दिन श्रद्धा से व्रत करेगा, उसके पाप नष्ट होंगे और उसे मेरा धाम मिलेगा।” तभी से एकादशी का व्रत शुरू हुआ और इस दिन को उत्पन्ना एकादशी कहा गया।
इस कथा की सीख यह है कि जब हम पूरी तरह भगवान की शरण में होते हैं, तो उनकी शक्ति खुद हमारी रक्षा करती है। एकादशी की दूसरी कथाएँ, जैसे सफला एकादशी व्रत कथा और रमा एकादशी व्रत कथा, भी पढ़ें।
इसके बाद आने वाली एकादशी
- मोक्षदा एकादशी: 20 दिसंबर 2026, रविवार
- सफला एकादशी: 3 जनवरी 2027, रविवार
- पौष पुत्रदा एकादशी: 18 जनवरी 2027, सोमवार
हर एकादशी की तारीख और पारण का समय एकादशी कब है पेज पर रोज़ अपडेट होता है। पूरे साल की सूची एकादशी लिस्ट में और महीने भर के व्रत-त्योहार हिंदू कैलेंडर में देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
उत्पन्ना एकादशी 2026 कब है?
व्रत 4 दिसंबर 2026, शुक्रवार को है। एकादशी तिथि 3 दिसंबर, रात 11:04 से 4 दिसंबर, रात 11:45 तक है।
उत्पन्ना एकादशी 2026 का पारण कब है?
पारण 5 दिसंबर, सुबह 6:58 से 9:03 के बीच करें (नई दिल्ली)।
उत्पन्ना एकादशी का क्या महत्व है?
मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु के शरीर से देवी एकादशी प्रकट हुई थीं और उन्होंने मुर नाम के दैत्य का अंत किया था। इसलिए इसे एकादशी व्रत का जन्मदिन माना जाता है।
क्या एकादशी का व्रत उत्पन्ना एकादशी से शुरू कर सकते हैं?
हाँ। जो लोग हर महीने एकादशी का व्रत शुरू करना चाहते हैं, वे परंपरा से उत्पन्ना एकादशी से शुरुआत करते हैं, क्योंकि इसी दिन देवी एकादशी का प्रकट होना माना जाता है। इस बार यह दिन 4 दिसंबर 2026, शुक्रवार है।
उत्पन्ना एकादशी किस महीने में आती है?
उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में यह मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण पक्ष की एकादशी है। गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के अमांत पंचांग में यही दिन कार्तिक कृष्ण एकादशी कहलाता है। अंग्रेज़ी कैलेंडर में यह नवंबर या दिसंबर में आती है।
उत्पन्ना एकादशी पर किसकी पूजा की जाती है?
भगवान विष्णु और देवी एकादशी की। पूजा में तुलसी दल, पीले फूल, फल और धूप-दीप चढ़ाए जाते हैं।
क्या उत्पन्ना एकादशी पर चावल खा सकते हैं?
नहीं, एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फलाहार में फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा ले सकते हैं।








