विद्यां ददाति विनयं,
विनयाद् याति पात्रताम् ।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति,
धनात् धर्मं ततः सुखम् ॥
हिन्दी भावार्थ:
विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता आती है, पात्रता से धन आता है, धन से धर्म होता है, और धर्म से सुख प्राप्त होता है।
साधु दीक्षा मंत्र (बिश्नोई जम्भेश्वर भगवान)
गंगा की धारा का समराथल पर आगमन(Samrathl par Ganga ji)
लाज रखो हे कृष्ण मुरारी: भजन (Laaj Rakho Hey Krishna Murari)
Post Views: 459








