
चरण कमल तेरे धोए धोए पीवां – शब्द कीर्तन (Charan Kamal Tere Dhoye Dhoye Peevan)
सिमर सिमर नाम जीवा तन मन होए निहाला, चरण कमल तेरे धोए

सिमर सिमर नाम जीवा तन मन होए निहाला, चरण कमल तेरे धोए

बिसर गई सब तात पराई, जब ते साध संगत मोहे पाई, ना

सब मिल कर मंगल गाओ, आज है जगराता, तुम प्रेम से माँ

मेरी माँ अंबे दुर्गे भवानी, किस जगह तेरा जलवा नहीं है, तेरा

मैया तू करती है पल में कमाल, मुझको भी करदे मैया तू

मिल कहो गर्व से हिन्दू है हम, यह हिन्दूस्तान हमारा, था स्वामी

कावड़ उठाले ध्यान, शिव का लगाले ॥ दोहा – शिव समान दाता

कहकर तो देख माँ से, दुःख दर्द तेरे दिल के, ये गले

नौ नौ रूप मैया के तो, बड़े प्यारे लागे, बड़े प्यारे लागे,

भवानी मुझे दर पे बुलाती रहियो, मैया जी मुझे दर पे बुलाती

घर में आओ लक्ष्मी माता, आओ पधारो श्री गणराजा । घर में

माँ का है जगराता, माँ को आज मनाएंगे, जय माता दी बोल

राम नवमी सुहानी मन भावनी, राम जी को संग लेके आई, राम

राम भक्त ले चला रे, राम की निशानी ॥ चौपाई – प्रभु

श्री राम तेरी महिमा से, काम हो गया है, मंदिर बनेगा रास्ता,

भज गोविन्दम् भज गोविन्दम्, गोविन्दं भज मूढ़मते। संप्राप्ते सन्निहिते काले, न हि

गंगा के खड़े किनारे भगवान् मांग रहे नैया भगवान् मांग रहे नैया

पटना के घाट पर, हमहु अरगिया देब, हे छठी मइया, पटना के

भोले दी बरात चढ़ी, गज वज के, सारीया ने भंग पीती, रज

सबना दा रखवाला ओ शिवजी डमरूवाला जी डमरू वाला उपर कैलाश रहंदा