
परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन: भजन (Parishram Kare Koi Kitana Bhi Lekin)
परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन, कृपा के बिना काम चलता नहीं

परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन, कृपा के बिना काम चलता नहीं

हरि हरि, हरि हरि, सुमिरन करो, हरि चरणारविन्द उर धरो हरे राम

राम नाम सोहि जानिये, जो रमता सकल जहान घट घट में जो

जयपुर से लाई मैं तो, चुनरी रंगवाई के, गोटा किनारी अपने, हाथो

भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए ओ मैया तेरे दरबार, में हाँ

चौसठ जोगणी रे भवानी, देवलिये रमजाय, घूमर घालणि रे भवानी, देवलिये रमजाय

दृष्टि हम पे दया की माँ डालो, बडी संकट की आई घड़ी

या देवी सर्वभूतेषु, दया-रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः ॥

देवो में सबसे बड़े, मेरे महादेव हैं, सर्पो की गले माल, चंद्रमा

मेरे भोले बाबा जटाधारी शम्भू, हे नीलकंठ त्रिपुरारी हे शम्भू ॥ नंदी

मेरे नाथ केदारा, तेरे नाम का सहारा, तेरे नाम की है जोली,

हरी हरी भांग का मजा लीजिये, सावन में शिव की बूटी पिया

शिव समान दाता नहीं, है ये देवों के है देव, भक्तों के

महिमा तेरी समझ सका ना, कोई भोले शंकर, कभी तो भोले भंडारी

कैलाश शिखर से उतर कर, मेरे घर आए है भोले शंकर ॥

चलो भोले बाबा के द्वारे, सब दुःख कटेंगे तुम्हारे, भोले बाबा भोले

ॐ महाकाल के काल तुम हो प्रभो, गुण के आगार सत्यम् शिवम्

इतनी विनती है तुमसे हे भोले मेरे, थाम के हाथ अब ना

भोला नही माने रे नहीं माने, मचल गए नचबे को, भोला नहीं

जन्माष्टमी, राधाष्टमी, होली, भागवत कथा, गीता पाठ, कीर्तन, भजन संध्या, फाल्गुन मेला