हरी हरी भांग का मजा लीजिये: भजन (Hari Hari Bhang Ka Maja Lijiye)

jambh bhakti logo

हरी हरी भांग का मजा लीजिये,
सावन में शिव की बूटी पिया कीजिये,
सावन में शिव की बूटी पिया कीजिये ॥

इसकी हर पत्ती में अज़ब खुमार है,
इसीलिए भंग भोले पीते बार बार है,
भंग पिके प्रेम शिव से बढ़ा लीजिये,
सावन में शिव की बूटी पिया कीजिये,
सावन में शिव की बूटी पिया कीजिये ॥

सावन महीना तो बस एक बहाना है,
भंग बूटी पीने का तो चलन पुराना है,
भंग की तरंग से ना डरा कीजिये,
सावन में शिव की बूटी पिया कीजिये,
सावन में शिव की बूटी पिया कीजिये ॥

करामात भंग में भारी दुरी सब मिटाये रे,
भंग के दीवानो को बस नजर शिव ही आये रे,
लेके शिव का नाम घुट भरा कीजिये,
सावन में शिव की बूटी पिया कीजिये,
सावन में शिव की बूटी पिया कीजिये ॥

एक सौ आठ लोटा भंग पिके ‘राजू’ गाये रे,
भंग ही ‘पवन’ भक्तो को शिव से मिलाये रे,
यूँ ना अपने आपको सजा दीजिये,
सावन में शिव की बूटी पिया कीजिये,
सावन में शिव की बूटी पिया कीजिये ॥

इस योग्य हम कहाँ हैं, गुरुवर तुम्हें रिझायें: भजन (Is Yogya Ham Kahan Hain, Guruwar Tumhen Rijhayen)

राधा चालीसा - जय वृषभान कुंवारी श्री श्यामा (Radha Chalisa - Jai Vrashbhan Kumari Shri Shyama)

हिरण्यगर्भ दूधेश्वर ज्योतिर्लिंग प्रादुर्भाव पौराणिक कथा! (Hiranyagarbh Shri Dudheshwarnath Mahadev Utpatti Pauranik Katha)

हरी हरी भांग का मजा लीजिये,
सावन में शिव की बूटी पिया कीजिये,
सावन में शिव की बूटी पिया कीजिये ॥

Picture of Sandeep Bishnoi

Sandeep Bishnoi

Leave a Comment