
शिव अमृतवाणी (Shiv Amritwani)
॥ भाग १ ॥ कल्पतरु पुन्यातामा, प्रेम सुधा शिव नाम हितकारक संजीवनी,

॥ भाग १ ॥ कल्पतरु पुन्यातामा, प्रेम सुधा शिव नाम हितकारक संजीवनी,

मन मोहन मूरत तेरी प्रभु, मिल जाओगे आप कहीं ना कहीं ।

राम तुम बड़े दयालु हो, नाथ तुम बड़े दयालु हो, हरी जी

जय राधे, जय कृष्ण, जय वृंदावन । श्री गोविंदा, गोपीनाथ, मदन-मोहन ॥

बनवारी रे, जीने का सहारा तेरा नाम रे, मुझे दुनिया वालों से

मुरली वाले ने घेर लयी अकेली पनिया गयी ॥ मै तो गयी

वृंदावनी वेणु कवणाचा माये वाजे । वेणुनादें गोवर्धनु गाजे ॥ पुच्छ पसरूनि

लचकि लचकि आवत मोहन, आवे मन भावे लचकि लचकि आवत मोहन, आवे

लागी लागी है लगन, म्हाने श्याम नाम की, भागी भागी म्हारे हिवड़े

नैनन में श्याम समाए गयो, मोहे प्रेम का रोग लगाए गयो ।

श्यामा श्याम सलौनी सूरत को शृंगार बसंती है । किशोरी श्याम सलोनी

मैं तो अपने मोहन की प्यारी, सजन मेरो गिरधारी, सजन मेरो गिरधारी,

श्री अत्रि मुनि द्वारा रचित श्रीराम-स्तुति रामायण के अरण्यकाण्ड से संबंधित है।

राम रस बरस्यो री, आज म्हारे आंगन में । जाग गये सब

मैया री मैया एक खिलौना- छोटा सा दिलवा दे चाबी भरकर जब

राम बिना नर ऐसे जैसे, अश्व लगाम बिना । जल जाये जिह्वा

राम भजा सो जीता जग में, राम भजा सो जीता रे। हृदय

हे गोविन्द हे गोपाल अब तो जीवन हारे । अब तो जीवन

जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी ॥ अजर अमर अज अरूप, सत चित

भभूती रमाये बाबा भोले नाथ आए, भोले नाथ आए बाबा डमरू बजाए,