
इस योग्य हम कहाँ हैं, गुरुवर तुम्हें रिझायें: भजन (Is Yogya Ham Kahan Hain, Guruwar Tumhen Rijhayen)
इस योग्य हम कहाँ हैं इस योग्य हम कहाँ हैं, गुरुवर तुम्हें

इस योग्य हम कहाँ हैं इस योग्य हम कहाँ हैं, गुरुवर तुम्हें

झूलन चलो हिंडोलना, वृषभान नंदनी, झूलन चलो हिडोलना, वृषभान नंदनी। सावन की

हो जो नजरे करम आपकी, फिर नहीं डर है संसार की, एक

बााबा नेने चलियौ हमरो अपन नगरी, बाबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी,

जय हो बैजनाथ जय हो भोले भंडारी जय हो बैजनाथ जय हो

शिवरात्रि, सावन के सोमवार, सोमवर, सोलह सोमवर, काँवड़, सावन के महिने मे

राख शरण गिरधारी साँवरे, मैं बिना मोल को चेरो, हरी मैं जैसो

तृष्णा ना जाये मन से ॥ दोहा – मथुरा वृन्दावन सघन, और

जरा इतना बता दे कान्हा, कि तेरा रंग काला क्यों । श्लोक-

फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन बिहारी, और साथ सज रही

नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा, श्याम सुंदर मुख चंदा, भजो

जरा देर ठहरो राम तमन्ना यही है अभी हमने जी भर के

नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो । और चरण हो

काल के पंजे से माता बचाओ, जय माँ अष्ट भवानी, काल के

शंकर तेरी जटा से, बहती है गंग धारा, काली घटा के अंदर,

चोख पुरावो, माटी रंगावो, आज मेरे पिया घर आवेंगे खबर सुनाऊ जो,

राम जपते रहो, काम करते रहो । वक्त जीवन का, यूँही निकल

जिस दिल में आपकी याद रहे प्रभु दिल मेरा वो दिल करदो

पंथ निहारत, डगर बहारथ, होता सुबह से शाम, कहियो दर्शन दीन्हे हो,

भगवन चौदह बरस वन वास, भगवन लौट अयोध्या आए । भगवन चौदह