कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहते हैं। साल की बारह पूर्णिमाओं में इसे सबसे पवित्र माना जाता है, इसलिए इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा, गंगा स्नान की पूर्णिमा और देव दीपावली का दिन भी कहा जाता है। इसी दिन महीने भर चलने वाला कार्तिक स्नान और दीपदान पूरा होता है, और सिख समाज गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व मनाता है। नीचे दी गई तारीखें और समय हर साल अपने आप अगले साल के अनुसार बदल जाते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा 2026: तारीख और समय
| पूर्णिमा | कार्तिक पूर्णिमा (कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा) |
| व्रत और स्नान-दान | 24 नवंबर 2026, मंगलवार |
| पूर्णिमा तिथि शुरू | 23 नवंबर, रात 11:43 |
| पूर्णिमा तिथि समाप्त | 24 नवंबर, रात 8:24 |
| सूर्योदय (24 नवंबर) | सुबह 6:50 |
| चंद्रोदय (24 नवंबर) | शाम 4:56 |
| सूर्यास्त (24 नवंबर) | शाम 5:24 |
| देव दीपावली | 24 नवंबर 2026, मंगलवार |
| गुरु नानक जयंती | 24 नवंबर 2026, मंगलवार |
| विक्रम संवत | 2083 |
समय नई दिल्ली के अनुसार है और जम्भ भक्ति की अपनी खगोलीय गणना (लाहिड़ी अयनांश) से निकाला गया है। पूर्णिमा तिथि के शुरू और खत्म होने का समय पूरे भारत में एक ही रहता है, पर सूर्योदय और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। अपने शहर का समय आज का पंचांग में देखें।
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
- त्रिपुरारी पूर्णिमा: मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर के तीन नगरों को एक ही बाण से नष्ट किया था। इसी खुशी में देवताओं ने दीप जलाए, जिसकी याद में देव दीपावली मनाई जाती है।
- कार्तिक स्नान का समापन: शरद पूर्णिमा से शुरू होने वाला कार्तिक मास का स्नान, दीपदान और तुलसी पूजन इसी दिन पूरा होता है। जो लोग पूरे महीने नियम नहीं निभा पाते, वे भी इस एक दिन स्नान-दान करके पुण्य कमाने की कोशिश करते हैं।
- भीष्म पंचक और तुलसी विवाह: देवउठनी एकादशी से शुरू होने वाले पाँच दिन के भीष्म पंचक व्रत और तुलसी विवाह का समय कार्तिक पूर्णिमा पर पूरा होता है।
- गुरु नानक जयंती: सिख धर्म के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है। गुरुद्वारों में प्रभात फेरी, अखंड पाठ, कीर्तन और लंगर होता है। उनकी स्तुति में गुरु नानक आरती भी गाई जाती है।
- दान का बड़ा दिन: कार्तिक पूर्णिमा पर किया गया स्नान, दीपदान और अन्नदान बहुत फलदायी माना जाता है। कार्तिक महीने की महिमा कार्तिक मास माहात्म्य कथा में विस्तार से बताई गई है।
देव दीपावली 2026 कब है?
देव दीपावली इस बार 24 नवंबर 2026, मंगलवार की शाम को है। वाराणसी में उस दिन सूर्यास्त शाम 5:08 पर होगा। सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में गंगा के घाटों पर लाखों दीपक जलाए जाते हैं और गंगा आरती होती है। घर पर भी इसी समय तुलसी, आँगन, दरवाज़े और पास के मंदिर या जलाशय पर दीपदान किया जाता है।
कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि
सुबह: स्नान, अर्घ्य और पूजा
- सूर्योदय से पहले उठें। हो सके तो गंगा, यमुना, पुष्कर या पास की किसी पवित्र नदी-सरोवर में स्नान करें। घर पर नहाते समय पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें।
- तांबे के लोटे में जल, रोली और फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। पीले फूल, तुलसी दल, फल, धूप और घी का दीपक चढ़ाएँ। कई घरों में इस दिन सत्यनारायण कथा सुनी जाती है और अंत में सत्यनारायण जी की आरती होती है।
- त्रिपुरारी पूर्णिमा होने के कारण भगवान शिव की पूजा भी करें। शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाएँ और ॐ जय शिव ओंकारा आरती करें।
- पूजा के बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्न, गुड़, तिल, गर्म कपड़े या कंबल का दान करें।
शाम: दीपदान और चंद्र अर्घ्य
- सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में घर के मंदिर, तुलसी के पौधे, मुख्य दरवाज़े, आँगन और छत पर मिट्टी के दीपक जलाएँ।
- पास में नदी या तालाब हो तो वहाँ जाकर दीपदान करें। पत्तों के दोने या आटे के दीये इस्तेमाल करें, प्लास्टिक या थर्माकोल नहीं, ताकि पानी गंदा न हो।
- चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को कच्चे दूध मिले जल से अर्घ्य दें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
- तुलसी जी के पास दीपक जलाकर तुलसी आरती करें। जो लोग गंगा किनारे हैं, वे शाम की गंगा आरती में शामिल हों।
कार्तिक पूर्णिमा का व्रत: क्या खाएँ, क्या न खाएँ
- जो लोग व्रत रखते हैं, वे दिन में फल, दूध और फलाहार लेते हैं और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर या सत्यनारायण कथा के बाद सात्विक भोजन करते हैं।
- इस दिन लहसुन-प्याज़, मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहें।
- झूठ, क्रोध और किसी का अपमान करने से बचें। कार्तिक पूर्णिमा को मन की शुद्धता का दिन माना जाता है।
- बुज़ुर्ग, बीमार और गर्भवती महिलाएँ अपनी सेहत के अनुसार ही व्रत रखें। पूजा और दान बिना व्रत के भी किया जा सकता है।
राजस्थान में कार्तिक पूर्णिमा: पुष्कर और कोलायत
राजस्थान में कार्तिक पूर्णिमा का स्नान खास तौर पर दो तीर्थों में होता है। अजमेर के पास पुष्कर में ब्रह्मा जी का प्राचीन मंदिर है। यहाँ का कार्तिक मेला देश-विदेश में प्रसिद्ध है और पूर्णिमा के दिन पुष्कर सरोवर में स्नान के साथ इसका धार्मिक हिस्सा पूरा होता है। बीकानेर ज़िले के कोलायत में कपिल मुनि की तपोभूमि मानी जाती है। कार्तिक पूर्णिमा पर यहाँ कपिल सरोवर में स्नान और दीपदान के लिए बड़ा मेला भरता है।
त्रिपुरासुर वध की कथा
तारकासुर के तीन पुत्र थे: तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली। तीनों ने कठोर तप करके ब्रह्मा जी से वरदान माँगा कि उनके लिए तीन ऐसे नगर बनें जो आकाश में घूमते रहें, और जब तक तीनों नगर एक सीध में न आएँ और एक ही बाण से उनका नाश न हो, तब तक उन्हें कोई मार न सके। मय दानव ने उनके लिए सोने, चाँदी और लोहे के तीन नगर बनाए, जिन्हें त्रिपुर कहा गया।
वरदान के घमंड में तीनों भाई देवताओं और ऋषियों को सताने लगे। तब सब देवता भगवान शिव की शरण में गए। शिव जी के लिए एक दिव्य रथ तैयार हुआ, जिसमें पृथ्वी रथ बनी, सूर्य और चंद्रमा उसके पहिए बने और ब्रह्मा जी सारथी बने। मेरु पर्वत धनुष बना, वासुकि नाग उसकी डोरी और भगवान विष्णु बाण बने।
जैसे ही तीनों नगर एक सीध में आए, भगवान शिव ने एक ही बाण चलाया और त्रिपुर जलकर नष्ट हो गया। उस दिन कार्तिक पूर्णिमा थी। तभी से भगवान शिव त्रिपुरारी कहलाए और देवताओं ने इस जीत की खुशी में दीप जलाए। यही परंपरा आज काशी में देव दीपावली के रूप में चलती है।
इसके बाद आने वाली पूर्णिमा
- मार्गशीर्ष पूर्णिमा: 23 दिसंबर 2026, बुधवार (दत्तात्रेय जयंती)
- पौष पूर्णिमा: 22 जनवरी 2027, शुक्रवार (शाकंभरी पूर्णिमा, माघ स्नान आरंभ)
- माघ पूर्णिमा: 20 फ़रवरी 2027, शनिवार (संत रविदास जयंती)
अगली पूर्णिमा की तारीख और समय पूर्णिमा कब है पेज पर रोज़ अपडेट होता है। पूरे साल की सूची पूर्णिमा लिस्ट में और महीने भर के व्रत-त्योहार हिंदू कैलेंडर में देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कार्तिक पूर्णिमा 2026 कब है?
व्रत और स्नान-दान दोनों 24 नवंबर 2026, मंगलवार को हैं। पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर, रात 11:43 से 24 नवंबर, रात 8:24 तक रहेगी। इसी दिन देव दीपावली और गुरु नानक जयंती भी है।
कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रोदय कितने बजे होगा?
नई दिल्ली में 24 नवंबर को चंद्रोदय शाम 4:56 पर होगा। अपने शहर का समय आज का पंचांग में देखें।
देव दीपावली 2026 कब है?
देव दीपावली 24 नवंबर 2026, मंगलवार की शाम को मनाई जाएगी। वाराणसी में उस दिन सूर्यास्त शाम 5:08 पर होगा, जिसके बाद प्रदोष काल में गंगा घाटों पर दीप जलाए जाते हैं।
गुरु नानक जयंती 2026 कब है?
गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व (गुरपुरब) कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो इस बार 24 नवंबर 2026, मंगलवार को है।
कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा क्यों कहते हैं?
मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का अंत किया था। इसी से वे त्रिपुरारी कहलाए और यह दिन त्रिपुरारी पूर्णिमा।
कार्तिक स्नान कब खत्म होता है?
शरद पूर्णिमा से शुरू होने वाला कार्तिक मास का स्नान कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के साथ पूरा होता है। इसी दिन भीष्म पंचक भी पूरा होता है।
कार्तिक पूर्णिमा पर क्या दान करें?
दीपदान इस दिन का सबसे खास दान है। इसके अलावा अन्न, गुड़, तिल, गर्म कपड़े या कंबल और ज़रूरतमंदों को भोजन देना शुभ माना जाता है।








