मार्गशीर्ष (अगहन) महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहते हैं। “मोक्षदा” का अर्थ है “मोक्ष देने वाली”। इसी दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है, क्योंकि मान्यता है कि कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को इसी तिथि पर भगवद् गीता का उपदेश दिया था। पितरों की शांति के लिए भी यह एकादशी खास मानी जाती है। नीचे दी गई तारीखें और समय हर साल अपने आप अगले साल के अनुसार बदल जाते हैं।
मोक्षदा एकादशी 2026: तारीख और समय
| एकादशी | मोक्षदा एकादशी, मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी |
| व्रत की तारीख | 20 दिसंबर 2026, रविवार |
| एकादशी तिथि शुरू | 19 दिसंबर, रात 10:10 |
| एकादशी तिथि समाप्त | 20 दिसंबर, रात 8:15 |
| पारण | 21 दिसंबर, सुबह 7:09 से 9:13 |
| सूर्योदय और सूर्यास्त (20 दिसंबर) | सुबह 7:08 और शाम 5:28 |
| गीता जयंती | 20 दिसंबर 2026, रविवार |
| विक्रम संवत | 2083 |
समय नई दिल्ली के अनुसार है और जम्भ भक्ति की अपनी खगोलीय गणना (लाहिड़ी अयनांश) से निकाला गया है। एकादशी तिथि के शुरू और खत्म होने का समय पूरे भारत में एक ही रहता है, पर पारण का समय सूर्योदय पर निर्भर करता है, इसलिए दूसरे शहरों में यह कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। अपने शहर का समय आज का पंचांग में देखें।
मोक्षदा एकादशी का महत्व
- पितरों की मुक्ति: कथा के अनुसार इस व्रत का पुण्य पितरों को अर्पित करने से उन्हें कष्ट से मुक्ति मिलती है। इसलिए बहुत से लोग यह व्रत अपने पूर्वजों के नाम से रखते हैं।
- गीता जयंती: यह दिन भगवद् गीता के जन्म का दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन गीता पढ़ने और बाँटने का बड़ा महत्व है।
- मार्गशीर्ष मास: गीता में भगवान ने खुद को महीनों में मार्गशीर्ष बताया है, इसलिए इस महीने की शुक्ल एकादशी को बहुत पुण्य देने वाली माना जाता है।
- वैकुंठ एकादशी से संबंध: दक्षिण भारत में धनु मास की शुक्ल एकादशी को वैकुंठ एकादशी कहते हैं। कई सालों में यह मोक्षदा एकादशी के दिन ही पड़ती है।
गीता जयंती क्यों मनाते हैं?
महाभारत युद्ध शुरू होने से ठीक पहले अर्जुन ने कुरुक्षेत्र में दोनों सेनाओं के बीच अपने ही गुरु, दादा, भाई और रिश्तेदारों को खड़ा देखा। मोह और दुख में उन्होंने धनुष रख दिया और युद्ध से मना कर दिया। तब उनके सारथी बने भगवान कृष्ण ने उन्हें कर्म, ज्ञान और भक्ति का जो उपदेश दिया, वही श्रीमद्भगवद् गीता है। गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं और यह महाभारत के भीष्म पर्व का हिस्सा है।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में गीता जयंती के आसपास हर साल गीता महोत्सव होता है, जिसमें ब्रह्म सरोवर पर दीपदान, गीता पाठ और कई कार्यक्रम होते हैं। देश भर के मंदिरों और इस्कॉन केंद्रों में भी इस दिन गीता पाठ और गीता दान होता है।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥गीता 2.47 | अर्थ: तुम्हारा अधिकार सिर्फ़ कर्म करने पर है, उसके फल पर नहीं। इसलिए फल को कर्म का कारण मत बनाओ, और कर्म न करने में भी तुम्हारी आसक्ति न हो।
गीता जयंती पर क्या करें?
- सुबह स्नान के बाद भगवान कृष्ण की पूजा करें और घर में रखी गीता पर फूल और चंदन चढ़ाएँ।
- पूरी गीता का पाठ न हो सके तो कम से कम एक अध्याय पढ़ें। बारहवाँ अध्याय (भक्ति योग) और पंद्रहवाँ अध्याय (पुरुषोत्तम योग) छोटे हैं और रोज़ के पाठ के लिए भी बहुत पढ़े जाते हैं।
- पाठ के बाद भगवद् गीता आरती और आरती कुंजबिहारी की गाएँ।
- किसी विद्यार्थी, मंदिर या पुस्तकालय को गीता की प्रति भेंट करें। इसे गीता दान कहते हैं।
- बच्चों को गीता का कोई एक श्लोक अर्थ के साथ याद करवाएँ। यह परंपरा आगे बढ़ाने का सबसे आसान तरीका है।
मोक्षदा एकादशी पूजा विधि
- दशमी की शाम सात्विक भोजन करें और रात में अनाज न लें।
- एकादशी की सुबह स्नान करके भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण के सामने दीपक जलाएँ और व्रत का संकल्प लें। अगर व्रत पितरों के लिए है, तो संकल्प में उनका नाम लें।
- भगवान को पीले फूल, तुलसी दल (एक दिन पहले तोड़ा हुआ), फल, पंचामृत, धूप और नैवेद्य चढ़ाएँ।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करें, गीता का पाठ करें और नीचे दी गई व्रत कथा पढ़ें।
- ॐ जय जगदीश हरे आरती करके प्रसाद बाँटें। रात में भजन-कीर्तन करें।
- द्वादशी को पारण के समय व्रत खोलें और पितरों के नाम से ज़रूरतमंदों को अन्न या वस्त्र दान करें।
व्रत के नियम
- एकादशी पर चावल और कोई भी अनाज नहीं खाया जाता। फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा और सेंधा नमक ले सकते हैं।
- लहसुन-प्याज़, मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहें।
- मन, वचन और कर्म से किसी को दुख न पहुँचाएँ। व्रत का असली फल मन की शुद्धता से मिलता है।
- बुज़ुर्ग, बीमार और गर्भवती महिलाएँ फलाहार या एक समय भोजन वाला व्रत रखें।
पारण कैसे और कब करें?
पारण यानी व्रत खोलना। एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में, हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई हिस्सा) खत्म होने के बाद पारण किया जाता है। इस बार हरि वासर 21 दिसंबर, देर रात 1:35 तक है। पारण 21 दिसंबर, सुबह 7:09 से 9:13 के बीच करें।
पारण से पहले भगवान को भोग लगाएँ, तुलसी दल और जल लें, फिर सात्विक भोजन करें। ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन और अन्न-वस्त्र का दान शुभ माना जाता है।
मोक्षदा एकादशी व्रत कथा
भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को यह कथा सुनाई थी। प्राचीन समय में गोकुल नगर में वैखानस नाम के धर्मात्मा राजा राज करते थे। उनकी प्रजा सुखी थी और राज्य में वेद पढ़ने वाले ब्राह्मण रहते थे। एक रात राजा ने सपने में देखा कि उनके पिता नरक में बहुत कष्ट भोग रहे हैं और उनसे मदद की गुहार लगा रहे हैं।
सुबह राजा बहुत बेचैन थे। उन्होंने ब्राह्मणों को बुलाकर सपना बताया। ब्राह्मणों ने कहा कि पास के वन में पर्वत मुनि का आश्रम है, जो भूत, भविष्य और वर्तमान सब जानते हैं। राजा तुरंत मुनि के पास गए और प्रणाम करके अपनी चिंता बताई।
पर्वत मुनि ने ध्यान लगाकर देखा और बताया, “राजन, तुम्हारे पिता ने पिछले जन्म में एक पाप किया था, उसी का फल वे भोग रहे हैं। तुम मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी का व्रत करो और उसका पुण्य अपने पिता को अर्पित कर दो। इससे उन्हें नरक से मुक्ति मिल जाएगी।”
राजा ने घर लौटकर परिवार के साथ विधि से मोक्षदा एकादशी का व्रत किया और उसका पुण्य पिता को दे दिया। उसी समय आकाश से फूलों की वर्षा हुई और राजा के पिता नरक से मुक्त होकर स्वर्ग चले गए। जाते हुए उन्होंने बेटे को आशीर्वाद दिया। इसलिए यह एकादशी मोक्षदा, यानी मोक्ष देने वाली कहलाई।
इसी महीने की दूसरी एकादशी, उत्पन्ना एकादशी, देवी एकादशी के प्रकट होने का दिन है। अगली एकादशी की कथा सफला एकादशी व्रत कथा में पढ़ें।
इसके बाद आने वाली एकादशी
- सफला एकादशी: 3 जनवरी 2027, रविवार
- पौष पुत्रदा एकादशी: 18 जनवरी 2027, सोमवार
- षटतिला एकादशी: 2 फ़रवरी 2027, मंगलवार
हर एकादशी की तारीख और पारण का समय एकादशी कब है पेज पर रोज़ अपडेट होता है। पूरे साल की सूची एकादशी लिस्ट में और महीने भर के व्रत-त्योहार हिंदू कैलेंडर में देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मोक्षदा एकादशी 2026 कब है?
व्रत 20 दिसंबर 2026, रविवार को है। एकादशी तिथि 19 दिसंबर, रात 10:10 से 20 दिसंबर, रात 8:15 तक है।
मोक्षदा एकादशी 2026 का पारण कब है?
पारण 21 दिसंबर, सुबह 7:09 से 9:13 के बीच करें (नई दिल्ली)।
गीता जयंती 2026 कब है?
गीता जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है, जो इस बार 20 दिसंबर 2026, रविवार को है। इसी दिन मोक्षदा एकादशी का व्रत भी है।
मोक्षदा एकादशी को मोक्षदा क्यों कहते हैं?
मोक्षदा का अर्थ है मोक्ष देने वाली। कथा के अनुसार राजा वैखानस ने यह व्रत करके उसका पुण्य अपने पिता को अर्पित किया और उनके पिता नरक के कष्ट से छूट गए।
गीता जयंती पर क्या करें?
भगवान कृष्ण की पूजा करें, गीता का पाठ करें (पूरा न हो सके तो कम से कम एक अध्याय), गीता की आरती गाएँ और किसी को गीता की प्रति भेंट करें।
क्या वैकुंठ एकादशी और मोक्षदा एकादशी एक ही हैं?
हमेशा नहीं। दक्षिण भारत में धनु मास (जब सूर्य धनु राशि में होता है) की शुक्ल एकादशी को वैकुंठ एकादशी कहते हैं। किसी साल यह मोक्षदा एकादशी के दिन पड़ती है और किसी साल अगली, यानी पौष पुत्रदा एकादशी के दिन।
भगवद् गीता में कितने अध्याय और श्लोक हैं?
गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। यह महाभारत के भीष्म पर्व का हिस्सा है।
क्या मोक्षदा एकादशी पर चावल खा सकते हैं?
नहीं, एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फलाहार में फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा ले सकते हैं।








