लेके पूजा की थाली
ज्योत मन की जगा ली
तेरी आरती उतारूँ
भोली माँ
तू जो दे दे सहारा
सुख जीवन का सारा
तेरे चरणों पे वारूँ
भोली माँ
ओ माँ.. ओ माँ..
लेके पूजा की थाली
ज्योत मन की जगा ली
तेरी आरती उतारूँ
भोली माँ
तू जो दे दे सहारा
सुख जीवन का सारा
तेरे चरणों पे वारूँ
भोली माँ
ओ माँ.. ओ माँ..
धूल तेरे चरणों की ले कर
माथे तिलक लगाया
हो.. धूल तेरे चरणों की ले कर
माथे तिलक लगाया
यही कामना लेकर मैया
द्वारे तेरे मैं आया
रहूँ मैं तेरा हो के
तेरी सेवा में खो के
सारा जीवन गुजारूं
भोली माँ
तू जो दे दे सहारा
सुख जीवन का सारा
तेरे चरणों पे वारूँ
भोली माँ
ओ माँ.. ओ माँ..
सफल हुआ ये जनम के मैं था
जन्मों से कंगाल
हो.. सफल हुआ ये जनम के मैं था
जन्मों से कंगाल
तूने भक्ति का धन देके
कर दिया मालामाल
अष्टोत्तर भैरव नामावलि (Bhairav Stotram)
कार्तिक मास माहात्म्य कथा: अध्याय 21 (Kartik Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 21)
राम पे जब जब विपदा आई - भजन (Ram Pe Jab Jab Vipada Aai)
रहे जब तक ये प्राण
करूं तेरा ही ध्यान
नाम तेरा पुकारूँ
भोली माँ
तू जो दे दे सहारा
सुख जीवन का सारा
तेरे चरणों पे वारूँ
भोली माँ
ओ माँ… ओ माँ…
लेके पूजा की थाली
ज्योत मन की जगा ली
तेरी आरती उतारूँ
भोली माँ
तू जो दे दे सहारा
सुख जीवन का सारा
तेरे चरणों पे वारूँ
भोली माँ
ओ माँ.. ओ माँ…








