मनमोहन तुझे रिझाऊं,
तुझे नित नए लाड़ लड़ाऊं,
बसा के तुझे नैनन में,
छिपा के तुझे नैनन में ॥
गीत बन जाऊं तेरी,
बांसुरी के स्वर का,
इठलाती बलखाती,
पतली कमर का,
पीला पटका बन जाऊं,
पीला पटका बन जाऊं,
बसा के तुझे नैनन में,
छिपा के तुझे नैनन में ॥
घुँघरू बनूँ जो तेरी,
पायल का प्यारे,
पल पल चूमा करूँ,
चरण तुम्हारे,
तेरे संग संग नाचूँ गाऊं,
बसा के तुझे नैनन में,
छिपा के तुझे नैनन में ॥
राधिका किशोरी संग,
रमण तुम्हारा,
मुझ को दिखा दो कभी,
ऐसा नज़ारा,
फिर चाहे मैं मर जाऊं,
फिर चाहे मैं मर जाऊं,
बसा के तुझे नैनन में,
छिपा के तुझे नैनन में ॥
हर बार तेरे दर पे, नव गीत सुनाएंगे: भजन (Har Baar Tere Dar Pe Nav Geet Sunayenge)
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 23 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 23)
मनमोहन तुझे रिझाऊं,
तुझे नित नए लाड़ लड़ाऊं,
बसा के तुझे नैनन में,
छिपा के तुझे नैनन में ॥
आरती कुंजबिहारी की | आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन | श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं | आरती श्री बाल कृष्ण जी की | ॐ जय जगदीश हरे | मधुराष्टकम्: धरं मधुरं वदनं मधुरं | कृष्ण भजन | अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं | श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी








