एकादशी कब है? अगली एकादशी की तारीख और पारण समय
अगली एकादशी देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी (कार्तिक शुक्ल) है। स्मार्त (गृहस्थ) व्रत 20 नवंबर 2026, शुक्रवार को और वैष्णव व्रत 21 नवंबर 2026, शनिवार को है। एकादशी तिथि 20 नवंबर, शुक्रवार, सुबह 7:16 से 21 नवंबर, शनिवार, सुबह 6:32 तक रहेगी। स्मार्त व्रत का पारण 21 नवंबर, शनिवार, दोपहर 1:10 से दोपहर 3:18 तक और वैष्णव व्रत का पारण 22 नवंबर, रविवार, सुबह 6:48 से सुबह 8:56 तक।
पारण: 21 नवंबर, शनिवार, दोपहर 1:10 से दोपहर 3:18
आने वाली 12 एकादशी: तारीख और पारण का समय
| व्रत की तारीख | एकादशी | तिथि का समय | पारण (स्मार्त) |
|---|---|---|---|
| 20 नवंबर 2026, शुक्रवार वैष्णव: 21 नवंबर 2026, शनिवार | देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी कार्तिक शुक्ल | 20 नवंबर, शुक्रवार, सुबह 7:16 से 21 नवंबर, शनिवार, सुबह 6:32 | 21 नवंबर, शनिवार, दोपहर 1:10 से दोपहर 3:18 |
| 4 दिसंबर 2026, शुक्रवार | उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष कृष्ण | 3 दिसंबर, गुरुवार, रात 11:04 से 4 दिसंबर, शुक्रवार, रात 11:45 | 5 दिसंबर, शनिवार, सुबह 6:58 से सुबह 9:03 |
| 20 दिसंबर 2026, रविवार | मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष शुक्ल | 19 दिसंबर, शनिवार, रात 10:10 से 20 दिसंबर, रविवार, रात 8:15 | 21 दिसंबर, सोमवार, सुबह 7:09 से सुबह 9:13 |
| 3 जनवरी 2027, रविवार | सफला एकादशी पौष कृष्ण | 2 जनवरी, शनिवार, दोपहर 2:25 से 3 जनवरी, रविवार, शाम 4:09 | 4 जनवरी, सोमवार, सुबह 7:14 से सुबह 9:18 |
| 18 जनवरी 2027, सोमवार वैष्णव: 19 जनवरी 2027, मंगलवार | पौष पुत्रदा एकादशी पौष शुक्ल | 18 जनवरी, सोमवार, सुबह 10:28 से 19 जनवरी, मंगलवार, सुबह 7:50 | 19 जनवरी, मंगलवार, दोपहर 1:35 से दोपहर 3:42 |
| 2 फ़रवरी 2027, मंगलवार | षटतिला एकादशी माघ कृष्ण | 1 फ़रवरी, सोमवार, सुबह 8:42 से 2 फ़रवरी, मंगलवार, सुबह 11:11 | 3 फ़रवरी, बुधवार, सुबह 7:08 से सुबह 9:18 |
| 17 फ़रवरी 2027, बुधवार | जया एकादशी माघ शुक्ल | 16 फ़रवरी, मंगलवार, रात 8:20 से 17 फ़रवरी, बुधवार, शाम 5:32 | 18 फ़रवरी, गुरुवार, सुबह 6:57 से सुबह 9:12 |
| 4 मार्च 2027, गुरुवार वैष्णव: 5 मार्च 2027, शुक्रवार | विजया एकादशी फाल्गुन कृष्ण | 3 मार्च, बुधवार, सुबह 4:45 से 4 मार्च, गुरुवार, सुबह 7:25 | 5 मार्च, शुक्रवार, सुबह 6:42 से सुबह 9:02 |
| 18 मार्च 2027, गुरुवार | आमलकी एकादशी फाल्गुन शुक्ल | 18 मार्च, गुरुवार, सुबह 4:22 से 19 मार्च, शुक्रवार, देर रात 1:52 | 19 मार्च, शुक्रवार, सुबह 7:13 से सुबह 8:51 |
| 2 अप्रैल 2027, शुक्रवार | पापमोचनी एकादशी चैत्र कृष्ण | 2 अप्रैल, शुक्रवार, देर रात 12:46 से 3 अप्रैल, शनिवार, देर रात 2:53 | 3 अप्रैल, शनिवार, दोपहर 1:39 से शाम 4:10 |
| 17 अप्रैल 2027, शनिवार | कामदा एकादशी चैत्र शुक्ल | 16 अप्रैल, शुक्रवार, सुबह 11:22 से 17 अप्रैल, शनिवार, सुबह 9:28 | 18 अप्रैल, रविवार, सुबह 5:52 से सुबह 7:43 |
| 2 मई 2027, रविवार | वरूथिनी एकादशी वैशाख कृष्ण | 1 मई, शनिवार, शाम 6:54 से 2 मई, रविवार, शाम 7:52 | 3 मई, सोमवार, सुबह 5:38 से सुबह 8:18 |
पारण यानी व्रत खोलना अगले दिन द्वादशी में, हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई हिस्सा) खत्म होने के बाद किया जाता है। ऊपर का पारण समय नई दिल्ली के सूर्योदय के अनुसार है। साल भर की सूची और कथाएँ: एकादशी लिस्ट 2027
स्मार्त और वैष्णव एकादशी में क्या अंतर है?
जब एकादशी सूर्योदय से पहले अरुणोदय काल में दशमी से छू जाती है, तो वैष्णव संप्रदाय उस दिन व्रत न रखकर अगले दिन (द्वादशी) व्रत रखते हैं। गृहस्थ लोग आमतौर पर स्मार्त तारीख पर व्रत रखते हैं। ज़्यादातर महीनों में दोनों एक ही दिन होती हैं।
फ़ोन के कैलेंडर में जोड़ें
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कैसे जोड़ें?
- Android (Google Calendar): बटन दबाकर "जोड़ें" चुनें। अगर फ़ोन पर न खुले तो यही बटन कंप्यूटर के ब्राउज़र में खोलें। एक बार जुड़ने पर आपके Google अकाउंट वाले हर फ़ोन में तारीखें दिखेंगी। न दिखें तो Google Calendar ऐप की Settings में इस कैलेंडर का "Sync" चालू करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अगली एकादशी कब है?
अगली एकादशी देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी (कार्तिक शुक्ल) है। स्मार्त (गृहस्थ) व्रत 20 नवंबर 2026, शुक्रवार को और वैष्णव व्रत 21 नवंबर 2026, शनिवार को है। एकादशी तिथि 20 नवंबर, शुक्रवार, सुबह 7:16 से 21 नवंबर, शनिवार, सुबह 6:32 तक रहेगी। स्मार्त व्रत का पारण 21 नवंबर, शनिवार, दोपहर 1:10 से दोपहर 3:18 तक और वैष्णव व्रत का पारण 22 नवंबर, रविवार, सुबह 6:48 से सुबह 8:56 तक।
एकादशी व्रत का पारण कब करें?
देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी का पारण 21 नवंबर, शनिवार, दोपहर 1:10 से दोपहर 3:18 के बीच करें (स्मार्त, नई दिल्ली)। वैष्णव व्रत का पारण 22 नवंबर, रविवार, सुबह 6:48 से सुबह 8:56 तक।
एक साल में कितनी एकादशी होती हैं?
साल में 24 एकादशी होती हैं, हर महीने दो (शुक्ल और कृष्ण पक्ष)। अधिक मास वाले साल में 26 हो जाती हैं।
एकादशी पर क्या नहीं खाना चाहिए?
एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा लिया जा सकता है।
