
अथ दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला – श्री दुर्गा द्वात्रिंशत नाम माला (Shri Durga Dwatrinshat Nam Mala)
दुर्गा दुर्गार्ति शमनी दुर्गापद्विनिवारिणी । दुर्गामच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी । दुर्गतोद्वारिणी दुर्ग निहन्त्री
माँ दुर्गा, अम्बे, काली, पार्वती और सभी देवी माँ के भजन, आरती, चालीसा और स्तोत्र।

दुर्गा दुर्गार्ति शमनी दुर्गापद्विनिवारिणी । दुर्गामच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी । दुर्गतोद्वारिणी दुर्ग निहन्त्री

अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते । भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि

ओम् ब्रह्मास्त्र-रुपिणी देवी, माता श्रीबगलामुखी । चिच्छिक्तिर्ज्ञान-रुपा च, ब्रह्मानन्द-प्रदायिनी ॥ 1 ॥

॥ श्रीसीताष्टोत्तरशतनामावली ॥ ॥ अथ श्रीमदानन्दरामायणान्तर्गत श्री सीताष्टोत्तरशतनामावलिः ॥ ॐ सीतायै नमः

नवदुर्गा, नवरात्रि, नवरात्रे, नवरात्रि, माता की चौकी, देवी जागरण, जगराता, शुक्रवार दुर्गा

॥ माँ अन्नपूर्णा चालीसा ॥ ॥ दोहा ॥ विश्वेश्वर पदपदम की रज

श्री नर्मदा चालीसा: ॥ दोहा॥ देवि पूजित, नर्मदा, महिमा बड़ी अपार ।

॥दोहा॥ जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार । महिष मर्दिनी कालिका, देहु अभय

॥ दोहा ॥ जय जय सीताराम के मध्यवासिनी अम्ब, देहु दर्श जगदम्ब

॥ दोहा ॥ श्री गुरु पद पंकज नमन, दुषित भाव सुधार, राणी

॥ दोहा ॥ सिर नवाइ बगलामुखी, लिखूं चालीसा आज ॥ कृपा करहु

॥ दोहा ॥ जय गिरी तनये दक्षजे शम्भू प्रिये गुणखानि । गणपति

॥ दोहा ॥ बन्दौं सन्तोषी चरण रिद्धि-सिद्धि दातार । ध्यान धरत ही

नमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी ॥

चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि, दुर्गा पूजा, गुप्त नवरात्रि, माता की चौकी, देवी

हर बात को भूलो मगर, माँ बाप मत भूलना, उपकार इनके लाखों

मैया री मैया एक खिलौना- छोटा सा दिलवा दे चाबी भरकर जब

जयपुर से लाई मैं तो, चुनरी रंगवाई के, गोटा किनारी अपने, हाथो

चौसठ जोगणी रे भवानी, देवलिये रमजाय, घूमर घालणि रे भवानी, देवलिये रमजाय

दृष्टि हम पे दया की माँ डालो, बडी संकट की आई घड़ी