
श्री जगन्नाथ संध्या आरती (Shri Jagganath Sandhya Aarti)
अनंत रूप अन्नांत नामअनंत रूप अन्नांत नाम,अनंत रूप अन्नांत नाम,आधी मूला नारायाणाआधी

अनंत रूप अन्नांत नामअनंत रूप अन्नांत नाम,अनंत रूप अन्नांत नाम,आधी मूला नारायाणाआधी

आरती श्री जगन्नाथआरती श्री जगन्नाथ मंगल कारी,आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी,मंगलकारी नाथ आपादा

नमस्ते नरसिंहायप्रह्लादाह्लाद-दायिनेहिरण्यकशिपोर्वक्षः-शिला-टङ्क-नखालये इतो नृसिंहः परतो नृसिंहोयतो यतो यामि ततो नृसिंहः बहिर्नृसिंहो हृदये

ॐ जय नरसिंह हरे,प्रभु जय नरसिंह हरे ।स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे,स्तंभ फाड़

आरती श्री जनक दुलारी की ।सीता जी रघुवर प्यारी की ॥जगत जननी

जय शनि देवा, जय शनि देवा,जय जय जय शनि देवा ।अखिल सृष्टि

इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ।इह विधि मंगल

जय सन्मति देवा,प्रभु जय सन्मति देवा।वर्द्धमान महावीर वीर अति,जय संकट छेवा ॥॥ऊँ

ॐ जय महावीर प्रभु,स्वामी जय महावीर प्रभो ।जगनायक सुखदायक,अति गम्भीर प्रभो ॥॥ॐ

ॐ जय महावीर प्रभु,स्वामी जय महावीर प्रभु ।कुण्डलपुर अवतारी,चांदनपुर अवतारी,त्रिशलानंद विभु ॥सिध्धारथ

श्री गुरु गोरक्षनाथ जी की संध्या आरतीऊँ गुरुजी शिव जय जय गोरक्ष

जय गोरख योगी (श्री गुरु जी) हर हर गोरख योगी ।वेद पुराण

श्री राम नवमी, विजय दशमी, सुंदरकांड, रामचरितमानस कथा और अखंड रामायण के

जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता ।आदि ज्योति महारानी,सब फल की दाता

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।विष्णु पूजा व्रत को धारण

त्योहार सरस्वती पूजा, वसंत पंचमी व केंद्रीय विद्यालयों, सरस्वती शिशु मंदिर, डी

जय सरस्वती माता,मैया जय सरस्वती माता ।सदगुण वैभव शालिनी,त्रिभुवन विख्याता ॥जय जय

ओइम् जय वीणे वाली,मैया जय वीणे वालीऋद्धि-सिद्धि की रहती,हाथ तेरे तालीऋषि मुनियों

जय जय संकटा भवानी,करहूं आरती तेरी ।शरण पड़ी हूँ तेरी माता,अरज सुनहूं

शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको ।दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको ।हाथ लिए