
राधा चालीसा – जय वृषभान कुंवारी श्री श्यामा (Radha Chalisa – Jai Vrashbhan Kumari Shri Shyama)
॥ दोहा ॥ श्री राधे वुषभानुजा, भक्तनि प्राणाधार । वृन्दाविपिन विहारिणी, प्रानावौ

॥ दोहा ॥ श्री राधे वुषभानुजा, भक्तनि प्राणाधार । वृन्दाविपिन विहारिणी, प्रानावौ

॥ दोहा ॥ श्री विश्वकर्म प्रभु वन्दऊं, चरणकमल धरिध्यान । श्री, शुभ,

नवदुर्गा, नवरात्रि, नवरात्रे, नवरात्रि, माता की चौकी, देवी जागरण, जगराता, शुक्रवार दुर्गा

॥ दोहा॥ विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय । कीरत कुछ वर्णन

॥ दोहा ॥ जैसे अटल हिमालय, और जैसे अडिग सुमेर । ऐसे

॥ दोहा ॥ सुमिर चित्रगुप्त ईश को, सतत नवाऊ शीश। ब्रह्मा विष्णु

॥ दोहा ॥ श्री गणपति गुरु गौरी पद प्रेम सहित धरि माथ

॥ माँ अन्नपूर्णा चालीसा ॥ ॥ दोहा ॥ विश्वेश्वर पदपदम की रज

॥ दोहा ॥ मैं हूँ बुद्धि मलीन अति । श्रद्धा भक्ति विहीन

सनातन मान्यताओं के अनुसार, गंगा दुनिया की सबसे पवित्रतम नदी है। और

॥ दोहा ॥ जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि । बन्दौं

श्री नर्मदा चालीसा: ॥ दोहा॥ देवि पूजित, नर्मदा, महिमा बड़ी अपार ।

॥ दोहा॥ बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम । अरुण

भक्तों के बीच अनेक खाटू चालीसा प्रसिद्ध हैं, इनमे से सीकर के

॥ दोहा ॥ जय जय तुलसी भगवती सत्यवती सुखदानी । नमो नमो

॥ दोहा॥ जय जय माता शीतला , तुमहिं धरै जो ध्यान ।

॥दोहा॥ जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार । महिष मर्दिनी कालिका, देहु अभय

॥ दोहा ॥ जय जय सीताराम के मध्यवासिनी अम्ब, देहु दर्श जगदम्ब

॥ दोहा ॥ श्री गुरु पद पंकज नमन, दुषित भाव सुधार, राणी

॥ दोहा ॥ सिर नवाइ बगलामुखी, लिखूं चालीसा आज ॥ कृपा करहु