
श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् (Vindhyeshwari Stotram)
निशुम्भ शुम्भ गर्जनी, प्रचण्ड मुण्ड खण्डिनी । बनेरणे प्रकाशिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥

निशुम्भ शुम्भ गर्जनी, प्रचण्ड मुण्ड खण्डिनी । बनेरणे प्रकाशिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥

दुर्गा दुर्गार्ति शमनी दुर्गापद्विनिवारिणी । दुर्गामच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी । दुर्गतोद्वारिणी दुर्ग निहन्त्री

अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते । भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि

॥ श्री बगलाष्टक ॥ पीत सुधा सागर में विराजत, पीत-श्रृंगार रचाई भवानी

ओम् ब्रह्मास्त्र-रुपिणी देवी, माता श्रीबगलामुखी । चिच्छिक्तिर्ज्ञान-रुपा च, ब्रह्मानन्द-प्रदायिनी ॥ 1 ॥

आत्मा रामा आनंद रमना आत्मा रामा आनंद रमना अच्युत केशव हरि नारायण

॥ श्रीसीताष्टोत्तरशतनामावली ॥ ॥ अथ श्रीमदानन्दरामायणान्तर्गत श्री सीताष्टोत्तरशतनामावलिः ॥ ॐ सीतायै नमः

सीता कल्याण वैभोगमे राम कल्याण वैभोगमे पवनज स्तुति पात्र पावन चरित्र रवि

राम राम राम राम नाम तारकम् राम कृष्ण वासुदेव भक्ति मुक्ति दायकम्

गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस, उत्तर भारत में अधिक प्रसिद्ध है।

राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे । सहस्रनाम तत्तुल्यं, रामनाम वरानने ॥

जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम् जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम् ॥१॥ दारिद्र्यरणसंहर्त्रीं भक्तानाभिष्टदायिनीम् ।

॥ दोहा ॥ हीं श्रीं, क्लीं, मेधा, प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड ।

शीतल हैं शीतल वचन, चन्दन से अधिकाय। कल्प वृक्ष सम प्रभु चरण,

॥ दोहा॥ शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन को, करूं प्रणाम । उपाध्याय

दोहा – श्री गुरु गणनायक सिमर, शारदा का आधार । कहूँ सुयश

दोहा- गणपति गिरिजा पुत्र को, सिमरूँ बारम्बार । हाथ जोड़ विनती करूँ,

॥ दोहा ॥ आदौ राम तपोवनादि गमनं हत्वाह् मृगा काञ्चनं वैदेही हरणं

॥ दोहा ॥ श्री गणपति गुरुपद कमल, प्रेम सहित सिरनाय । नवग्रह

॥ दोहा ॥ जय जय जल देवता, जय ज्योति स्वरूप । अमर