
भजो रे भैया, राम गोविंद हरि: भजन (Bhajo Re Bhaiya Ram Govind Hari)
भजो रे भैया, राम गोविंद हरि, राम गोविंद हरि, भजो रे भईया,
भगवान विष्णु, नारायण, नरसिंह और जगन्नाथ जी की आरती, स्तोत्र, भजन और एकादशी व्रत कथाएँ।

भजो रे भैया, राम गोविंद हरि, राम गोविंद हरि, भजो रे भईया,

जगदीश ज्ञान दाता, सुख मूल शोकहारी ।भगवन् ! तुम्हीं सदा हो, निष्पक्ष

आरती कीजै नरसिंह कुंवर की ।वेद विमल यश गाउँ मेरे प्रभुजी ॥पहली

दुनियाँ में सबसे ज्यादा लोकप्रिय आरती ओम जय जगदीश हरे पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी द्वारा

जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।सत्यनारायण स्वामी,जन पातक हरणा ॥ॐ जय

माँ तुलसी पूजन, तुलसी विवाह एवं कार्तिक माह में माँ तुलसी की आरती सबसे

जय जय तुलसी माता,मैया जय तुलसी माता ।सब जग की सुख दाता,सबकी

चतुर्भुज जगन्नाथकंठ शोभित कौसतुभः ॥पद्मनाभ, बेडगरवहस्य,चन्द्र सूरज्या बिलोचनः जगन्नाथ, लोकानाथ,निलाद्रिह सो पारो

अनंत रूप अन्नांत नामअनंत रूप अन्नांत नाम,अनंत रूप अन्नांत नाम,आधी मूला नारायाणाआधी

आरती श्री जगन्नाथआरती श्री जगन्नाथ मंगल कारी,आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी,मंगलकारी नाथ आपादा

नमस्ते नरसिंहायप्रह्लादाह्लाद-दायिनेहिरण्यकशिपोर्वक्षः-शिला-टङ्क-नखालये इतो नृसिंहः परतो नृसिंहोयतो यतो यामि ततो नृसिंहः बहिर्नृसिंहो हृदये

ॐ जय नरसिंह हरे,प्रभु जय नरसिंह हरे ।स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे,स्तंभ फाड़

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।विष्णु पूजा व्रत को धारण

साखी विष्णु विसार मत जाई

साखी – आये म्हारे जम्भ गुरु जगदीश प्रातःकाल-

जम्भेश्वर भगवान आरती (जय गुरुदेव दयानिधि)

आरती जय जम्भेश्वर की आरती
विष्णु अवतार जाम्भोजी ( Vishnu Avatar Jambhoji ) योगी अवधूत

विष्णु भक्तों का बलिदान नाथोजी ने कहा- हे शिष्य! सम्भराथल पर
