दिवाली पूजा विधि, लक्ष्मी गणेश पूजन सामग्री लिस्ट, पूजा का शुभ मुहूर्त, मंत्र, आरती और घर पर सरल तरीके से दीपावली पूजन करने की संपूर्ण जानकारी यहां जानें।
परिचय
दीपावली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, दीपक जलाते हैं, रंगोली बनाते हैं और माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपावली पर माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और खुशहाली आती है। भगवान गणेश की पूजा विघ्नों को दूर करने और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए की जाती है।
अगर आप जानना चाहते हैं कि दिवाली पूजा विधि क्या है, लक्ष्मी पूजा कैसे करें, पूजन सामग्री कौन-कौन सी चाहिए और पूजा का शुभ मुहूर्त कैसे पता करें, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी है।
इस लेख में आपको diwali puja vidhi in hindi, diwali laxmi puja vidhi, पूजा की पूरी सामग्री, मंत्र, आरती और घर, दुकान या ऑफिस में दीपावली पूजन करने का सरल तरीका बताया गया है।
दिवाली 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त और चौघड़िया
दिवाली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास शुरू होने वाला समय होता है। कई परंपराओं में इस दौरान स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन करना शुभ माना जाता है।
दिवाली 2026 की तिथि: 8 नवंबर 2026, रविवार को दीपावली मनाई जाएगी या नहीं, इसकी पुष्टि स्थानीय पंचांग से जरूर करें। दिवाली की तारीख और मुहूर्त की गणना में स्थानीय पंचांग तथा धार्मिक परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है।
इसलिए पूजा करने से पहले अपने शहर के पंचांग में तिथि, प्रदोष काल, वृषभ लग्न और निशीथ काल की जानकारी देख लें।
दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त कैसे चुनें?
लक्ष्मी पूजन के लिए मुहूर्त चुनते समय इन बातों का ध्यान रखें:
- प्रदोष काल: सूर्यास्त के बाद का समय, जिसमें दीपावली पूजन की परंपरा प्रचलित है।
- स्थिर लग्न: कई परिवारों में वृषभ लग्न के दौरान लक्ष्मी पूजन करना शुभ माना जाता है।
- चौघड़िया मुहूर्त: कुछ लोग पूजा का समय निर्धारित करने के लिए शुभ चौघड़िया भी देखते हैं।
- स्थानीय पंचांग: आपके शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के अनुसार मुहूर्त बदल सकता है।
दिवाली puja muhurat देखते समय केवल सामान्य इंटरनेट समय पर निर्भर न रहें। अपने शहर के लिए प्रकाशित विश्वसनीय पंचांग से पूजा का समय निर्धारित करें।
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दिवाली पूजन सामग्री लिस्ट: पूजा में क्या-क्या चाहिए?
दिवाली की पूजा करने से पहले सभी जरूरी सामग्री एक जगह इकट्ठा कर लेना चाहिए। इससे पूजा के दौरान किसी चीज की कमी नहीं होती।
नीचे दी गई दीवाली पूजन सामग्री लिस्ट घर पर लक्ष्मी-गणेश पूजन की तैयारी करने में मदद करेगी।
दिवाली पूजा की मुख्य सामग्री
- माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां या तस्वीरें
- पूजा के लिए लकड़ी की चौकी
- लाल या पीला कपड़ा
- पूजा की थाली
- जल से भरा कलश
- आम के पत्ते, यदि उपलब्ध हों
- नारियल
- रोली और कुमकुम
- अक्षत यानी साबुत चावल
- कलावा या मौली
- चंदन
- फूल और फूलों की माला
- कमल का फूल, यदि उपलब्ध हो
- धूप और अगरबत्ती
- घी और तेल के दीपक
- रुई की बत्तियां
- कपूर
- पंचामृत
- मौसमी फल
- मिठाई और प्रसाद
- खील और बताशे
- पान और सुपारी
- इलायची और लौंग
- सिक्के या उपलब्ध धन
- पूजा के लिए स्वच्छ जल
- आरती की पुस्तक या प्रिंट की हुई आरती
- धनिया के बीज, यदि आपकी पारिवारिक परंपरा में उपयोग होते हों
- कमलगट्टा, यदि उपलब्ध हो
- कुबेर पूजा के लिए प्रतीकात्मक धन या सिक्के
- बहीखाता और कलम, यदि दुकान या व्यापार की पूजा करनी हो।
ध्यान रखें कि सभी सामग्री हर परिवार में अनिवार्य नहीं होती। आप अपनी पारिवारिक परंपरा और उपलब्ध सामग्री के अनुसार पूजा कर सकते हैं।

चौकी स्थापना और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की सही दिशा
दिवाली पूजा की शुरुआत पूजा स्थल की सफाई और चौकी तैयार करने से होती है। पूजा का स्थान साफ, शांत और व्यवस्थित होना चाहिए।
1. चौकी कैसे सजाएं?
सबसे पहले लकड़ी की चौकी को साफ करके उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चौकी पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित करें।
चौकी के पास पूजा सामग्री, फूल, दीपक, धूप और जल का पात्र व्यवस्थित रखें।
2. लक्ष्मी जी और गणेश जी को किस दिशा में रखें?
लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की स्थापना के लिए उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण या पूर्व दिशा का स्थान कई परिवारों में पसंद किया जाता है। हालांकि, उपलब्ध जगह और पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्यवस्था अलग हो सकती है।
पूजा करते समय यह ध्यान रखें कि:
- माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां साफ चौकी पर स्थापित हों।
- पूजा करने वाला व्यक्ति सुविधानुसार पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठ सकता है।
- दोनों मूर्तियों के सामने पर्याप्त जगह हो।
- मूर्तियों के आसपास अनावश्यक सामान न रखें।
3. लक्ष्मी जी के किस तरफ गणेश जी को बैठाना चाहिए?
सामान्य घरेलू लक्ष्मी-गणेश पूजन की प्रचलित व्यवस्था में भगवान गणेश को माता लक्ष्मी के दाहिनी ओर और माता सरस्वती को बाईं ओर रखा जा सकता है। यहां दाहिनी-बाईं दिशा का निर्धारण मूर्तियों की ओर से किया जाता है, इसलिए व्यवस्था करते समय भ्रम न रखें।
हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में मूर्तियों की स्थापना के तरीके अलग हो सकते हैं। अपनी पारिवारिक पूजा पद्धति का पालन करना उचित है।

दिवाली लक्ष्मी-गणेश पूजन की सरल विधि: चरण-दर-चरण
अगर आप पहली बार पूजा कर रहे हैं, तो नीचे बताई गई दीपावली पूजा विधि सरल तरीके से अपनाई जा सकती है।
चरण 1: घर और पूजा स्थल की सफाई करें
दिवाली से पहले घर की अच्छी तरह सफाई करें। पूजा स्थल को साफ कपड़े से पोंछें और चौकी तैयार करें। इसके बाद पूजा की सभी सामग्री एक जगह रख लें।
घर के मुख्य दरवाजे पर रंगोली बनाएं और परंपरा के अनुसार दीपक जलाने की तैयारी करें।
चरण 2: चौकी पर मूर्तियां स्थापित करें
चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित करें। यदि आपकी परंपरा में माता सरस्वती और कुबेर की पूजा भी की जाती है, तो उनके प्रतीक या तस्वीर भी रख सकते हैं।
मूर्तियों के सामने फूल, अक्षत, रोली और दीपक रखें।
चरण 3: कलश स्थापना करें
एक साफ कलश में जल भरें। उसमें परंपरा के अनुसार सुपारी, सिक्का या अक्षत डाल सकते हैं। कलश के मुख पर आम के पत्ते और नारियल रखने की परंपरा भी प्रचलित है।
कलश को पूजा स्थल पर उचित स्थान पर रखें और श्रद्धापूर्वक उसका पूजन करें।
चरण 4: संकल्प लें
हाथ में थोड़ा जल, अक्षत और फूल लेकर मन में पूजा का संकल्प करें।
आप सरल शब्दों में प्रार्थना कर सकते हैं:
“हे माता लक्ष्मी और भगवान गणेश! मैं श्रद्धा और भक्ति के साथ दीपावली की पूजा कर रहा हूं। कृपया मेरे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें और हमारे जीवन में सुख, शांति, सद्बुद्धि तथा समृद्धि प्रदान करें।”
इसके बाद हाथ में लिया हुआ जल निर्धारित पात्र में छोड़ दें।
चरण 5: भगवान गणेश की पूजा करें
हिंदू पूजा परंपरा में किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश का पूजन किया जाता है।
भगवान गणेश को रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार फल और मिठाई का भोग लगाएं।
इसके बाद गणेश मंत्र का जाप करें:
ॐ गं गणपतये नमः।
इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक 11 बार जाप कर सकते हैं।
चरण 6: माता लक्ष्मी की पूजा करें
अब माता लक्ष्मी को फूल, अक्षत, रोली, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें। अपनी परंपरा के अनुसार कमल का फूल, खील-बताशे, मिठाई और फल भी चढ़ाएं।
माता लक्ष्मी के सामने अपनी प्रार्थना रखें और परिवार में सुख-समृद्धि, शांति तथा मेहनत से धन कमाने की सद्बुद्धि की कामना करें।
लक्ष्मी मंत्र का जाप करें:
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
इस मंत्र का 11 या 108 बार जाप अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार किया जा सकता है।
चरण 7: कुबेर पूजा करें
दीपावली के अवसर पर कई परिवारों में भगवान कुबेर की पूजा भी की जाती है। भगवान कुबेर को धन के देवता के रूप में पूजा जाता है।
कुबेर पूजा के लिए उनके चित्र या प्रतीक के सामने फूल, अक्षत और दीपक अर्पित करें।
आप इस मंत्र का जाप कर सकते हैं:
ॐ कुबेराय नमः।
कुबेर पूजा विधि दिवाली में क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए इसे अपनी मान्यता के अनुसार करें।
चरण 8: बहीखाता, कलम और धन का पूजन करें
व्यापारी वर्ग में दिवाली पर बहीखाता, कलम, कैलकुलेटर और व्यापार से जुड़े दस्तावेजों की पूजा करने की परंपरा है।
बहीखाते पर रोली या कुमकुम से शुभ चिह्न बनाएं। इसके बाद फूल और अक्षत अर्पित करें।
नए बहीखाते की शुरुआत करने वाले व्यापारी उसमें शुभ शब्द लिखकर नए वित्तीय वर्ष या व्यापारिक चक्र के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।
चरण 9: भोग लगाएं
पूजा के दौरान माता लक्ष्मी और भगवान गणेश को फल, मिठाई, खील-बताशे या अपनी परंपरा के अनुसार तैयार किया गया प्रसाद अर्पित करें।
भोग लगाते समय मन को शांत रखें और भगवान के प्रति आभार व्यक्त करें।
चरण 10: आरती करें और क्षमा प्रार्थना करें
पूजा पूरी होने के बाद माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती करें।
आरती के दौरान परिवार के सभी सदस्य शामिल हो सकते हैं। आरती के बाद हाथ जोड़कर प्रार्थना करें कि पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा करें।
अंत में प्रसाद सभी लोगों में बांट दें।
इस तरह आप diwali puja vidhi step by step in hindi का पालन करते हुए घर पर सरलता से पूजा कर सकते हैं।
दिवाली पूजा के मुख्य मंत्र और आरती
दिवाली की पूजा में मंत्रों का जाप और आरती करना विशेष महत्व रखता है। आप अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
1. भगवान गणेश का मंत्र
मंत्र:
ॐ गं गणपतये नमः।
अर्थ: भगवान गणेश को नमन। उनसे विघ्न दूर करने और सद्बुद्धि प्रदान करने की प्रार्थना की जाती है।
2. माता लक्ष्मी का मंत्र
मंत्र:
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
अर्थ: माता महालक्ष्मी को नमन। उनसे सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की जाती है।
3. भगवान कुबेर का मंत्र
मंत्र:
ॐ कुबेराय नमः।
इस मंत्र का जाप भगवान कुबेर के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
4. दिवाली की आरती
लक्ष्मी पूजन के बाद माता लक्ष्मी की प्रचलित आरती और भगवान गणेश की आरती की जा सकती है।
आरती करते समय दीपक को सावधानी से पकड़ें और आसपास ज्वलनशील वस्तुएं न रखें।
लक्ष्मी पूजन की थाली कैसे सजाएं?
लक्ष्मी पूजन की थाली को साफ और व्यवस्थित तरीके से सजाना चाहिए। थाली में पूजा के लिए जरूरी वस्तुएं रखें, ताकि पूजा करते समय आसानी रहे।
थाली में निम्नलिखित सामग्री रखी जा सकती है:
- रोली और कुमकुम
- अक्षत
- फूल और पुष्पदल
- धूप या अगरबत्ती
- छोटा दीपक
- कपूर
- मिठाई या बताशे
- पान और सुपारी, यदि परंपरा में शामिल हों
- थोड़े से सिक्के
थाली को फूलों से सजाया जा सकता है। ध्यान रखें कि दीपक रखने के लिए सुरक्षित जगह हो और थाली में रखी सामग्री व्यवस्थित हो।

दिवाली पर कितने दीये जलाने चाहिए और कहां रखें?
दीपावली का मुख्य आकर्षण दीपक हैं। इस दिन घर के अलग-अलग स्थानों पर दीपक जलाने की परंपरा है।
कई परिवार 11, 21, 51 या 101 दीपक जलाते हैं। हालांकि, दीपकों की संख्या के लिए कोई एक अनिवार्य नियम सभी परिवारों पर लागू नहीं होता।
आप अपनी सुविधा, उपलब्धता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दीपक जला सकते हैं।
दीपक कहां रखें?
1. पूजा स्थल पर: माता लक्ष्मी और भगवान गणेश के सामने सुरक्षित स्थान पर दीपक जलाएं।
2. मुख्य दरवाजे पर: घर के प्रवेश द्वार पर दीपक रख सकते हैं।
3. आंगन या बालकनी में: सुरक्षित जगह पर दीपक रखकर घर को रोशन करें।
4. खिड़कियों के पास: दीपक ऐसी जगह रखें जहां से पर्दे, कागज या अन्य ज्वलनशील वस्तुओं में आग लगने का खतरा न हो।
5. घर के अन्य स्थानों पर: अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार आंगन या अन्य सुरक्षित स्थानों पर दीपक जला सकते हैं।
रात भर दीपक जलाने की परंपरा कुछ परिवारों में प्रचलित है, लेकिन खुले दीपक को बिना निगरानी छोड़ना सुरक्षित नहीं है। यदि दीपक लंबे समय तक जलाना हो, तो उसे स्थिर, अग्निरोधी आधार पर रखें और आग से सुरक्षा के उचित इंतजाम करें।

दिवाली की रात की पूजा विधि
दिवाली की रात को पूजा के बाद घर में दीपक जलाने, भजन करने और परिवार के साथ प्रसाद बांटने की परंपरा है।
यदि आप जानना चाहते हैं कि दिवाली की रात की पूजा विधि क्या है, तो इन बातों का ध्यान रखें:
- पूजा स्थल को साफ रखें।
- माता लक्ष्मी और भगवान गणेश के सामने दीपक जलाएं।
- लक्ष्मी मंत्र और गणेश मंत्र का जाप करें।
- अपनी परंपरा के अनुसार आरती करें।
- परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटें।
- घर के मुख्य दरवाजे पर दीपक रखें।
- रात में दीपकों और अन्य अग्नि स्रोतों की सुरक्षा का ध्यान रखें।
कुछ परिवारों में आधी रात के आसपास विशेष पूजा की परंपरा भी होती है। यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक परिवार एक ही समय पर पूजा करे।
दुकान और ऑफिस में दिवाली पूजा विधि
दिवाली पर घर के साथ-साथ दुकान, कार्यालय और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में भी पूजा की जाती है।
व्यापारी माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और अपनी परंपरा के अनुसार भगवान कुबेर का पूजन करते हैं। इस अवसर पर व्यापार में ईमानदारी, उन्नति और आर्थिक स्थिरता की कामना की जाती है।
दुकान में दिवाली पूजा कैसे करें?
चरण 1: दुकान की सफाई करें।
दिवाली से पहले दुकान, काउंटर, अलमारियों और पूजा स्थल की सफाई करें।
चरण 2: पूजा स्थल तैयार करें।
काउंटर के पास साफ जगह पर चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
चरण 3: लक्ष्मी-गणेश की स्थापना करें।
माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
चरण 4: व्यापारिक सामान का पूजन करें।
बहीखाता, कलम, कंप्यूटर, कैलकुलेटर या व्यापार से जुड़ी अन्य वस्तुओं का प्रतीकात्मक पूजन कर सकते हैं।
चरण 5: मंत्र और आरती करें।
गणेश मंत्र और लक्ष्मी मंत्र का जाप करें। इसके बाद आरती करें और प्रसाद बांटें।
ऑफिस में दिवाली पूजा कैसे करें?
ऑफिस में पूजा करने के लिए एक साफ और सुरक्षित स्थान चुनें। कर्मचारी मिलकर संक्षिप्त पूजा कर सकते हैं। पूजा के दौरान कार्यालय के नियमों, अग्नि सुरक्षा और सभी कर्मचारियों की सुविधा का ध्यान रखें।
बहीखाता और कलम पूजा विधि
बहीखाता या नए लेखा रजिस्टर को साफ कपड़े पर रखें। उस पर रोली या कुमकुम से शुभ चिह्न बनाएं और फूल व अक्षत अर्पित करें।
कलम और व्यापारिक दस्तावेजों का भी प्रतीकात्मक पूजन किया जा सकता है। डिजिटल कारोबार करने वाले लोग अपने कंप्यूटर या अन्य कार्य उपकरणों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनका पूजन कर सकते हैं।
इसे कई व्यापारी चोपड़ा पूजन या बहीखाता पूजा भी कहते हैं।

दिवाली पूजा में माता लक्ष्मी को क्या भोग लगाएं?
माता लक्ष्मी को भोग अर्पित करते समय स्वच्छता और श्रद्धा का ध्यान रखना चाहिए।
प्रचलित परंपराओं में निम्नलिखित वस्तुएं भोग में शामिल की जाती हैं:
- खील और बताशे
- खीर
- पेड़ा
- रसगुल्ला या अन्य मिठाई
- मौसमी फल
- अनार
- नारियल
- सिंघाड़ा, यदि उपलब्ध हो
- कमल का फूल, यदि उपलब्ध हो
इनमें से सभी वस्तुएं अनिवार्य नहीं हैं। आपके क्षेत्र और परिवार में जिस प्रकार का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा है, उसका पालन कर सकते हैं।
भोग में ताजा और स्वच्छ खाद्य पदार्थों का उपयोग करें। पूजा के बाद प्रसाद परिवार और अन्य लोगों में बांटें।
दिवाली पर क्या करें और क्या न करें?
दीपावली का त्योहार श्रद्धा, खुशियों और आपसी प्रेम का प्रतीक है। इस दिन कुछ बातों का ध्यान रखने से पूजा और उत्सव बेहतर तरीके से मनाया जा सकता है।
दिवाली पर क्या करें?
- घर और पूजा स्थल की सफाई करें।
- पूजा की सामग्री पहले से तैयार रखें।
- श्रद्धापूर्वक माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करें।
- जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।
- परिवार और मित्रों के साथ खुशियां बांटें।
- सुरक्षित तरीके से दीपक जलाएं।
- बच्चों को पटाखों और आग से दूर रखें।
- बिजली की सजावट में अच्छी गुणवत्ता वाले उपकरणों का उपयोग करें।
दिवाली पर क्या न करें?
- पूजा स्थल को गंदा न रखें।
- दीपक पर्दों, कागज या ज्वलनशील वस्तुओं के पास न रखें।
- जलते हुए दीपक को बिना निगरानी न छोड़ें।
- पटाखे घर के अंदर न जलाएं।
- धार्मिक परंपराओं के नाम पर दूसरों पर अनावश्यक दबाव न डालें।
- भोजन और प्रसाद की बर्बादी न करें।
- त्योहार के दौरान किसी से झगड़ा या अपमानजनक व्यवहार न करें।
ध्यान रखें कि पूजा का उद्देश्य केवल धार्मिक रीति-रिवाज पूरे करना नहीं, बल्कि मन में श्रद्धा, सकारात्मकता और सद्भाव बनाए रखना भी है।
दिवाली पूजन के बाद दीयों का क्या करें?
दिवाली की पूजा पूरी होने के बाद दीपकों को लेकर अलग-अलग परिवारों में अलग परंपराएं होती हैं।
कुछ लोग दीपक पूरी तरह बुझने तक सुरक्षित स्थान पर रखते हैं, जबकि कुछ लोग तेल या घी समाप्त होने के बाद उन्हें हटा देते हैं।
दीपक बुझ जाने और ठंडा हो जाने के बाद ही उन्हें उठाएं। गर्म दीपक को हाथ से न छुएं।
मिट्टी के दीपकों को दोबारा उपयोग किया जा सकता है, यदि वे अच्छी स्थिति में हों। टूटे हुए दीपकों को सावधानी से अलग करें और स्थानीय कचरा प्रबंधन व्यवस्था के अनुसार निपटाएं।
यदि दीपक में बचा हुआ तेल या घी है, तो उसे नाली में डालने के बजाय उचित तरीके से संभालें।
धार्मिक दृष्टि से दीपकों के निपटान की परंपरा क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है। अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करते हुए सुरक्षा और स्वच्छता का ध्यान रखें।
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दिवाली पूजा विधि से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का सबसे उत्तम समय क्या है?
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। कई परंपराओं में स्थिर लग्न, विशेषकर वृषभ लग्न, के दौरान पूजा करना शुभ माना जाता है। सही समय के लिए अपने शहर का पंचांग देखें, क्योंकि मुहूर्त स्थान के अनुसार बदलता है।
2. दिवाली पूजा में लक्ष्मी जी के किस तरफ गणेश जी को बैठाना चाहिए?
प्रचलित घरेलू पूजा व्यवस्था में भगवान गणेश को माता लक्ष्मी के दाहिनी ओर स्थापित किया जाता है। हालांकि, अलग-अलग पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं में व्यवस्था अलग हो सकती है।
3. दिवाली की सरल पूजा विधि क्या है?
सबसे पहले पूजा स्थल साफ करें और चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित करें। इसके बाद कलश पूजन, रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप और भोग अर्पित करें। अंत में मंत्र जाप, आरती और क्षमा प्रार्थना करें।
4. दिवाली पूजा में कौन-कौन सी मुख्य सामग्री लगती है?
दिवाली पूजा में लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, चौकी, लाल कपड़ा, रोली, अक्षत, कलावा, फूल, धूप, अगरबत्ती, दीपक, घी या तेल, रुई की बत्तियां, कपूर, पंचामृत, फल, मिठाई, खील-बताशे और जल मुख्य सामग्री में शामिल हैं।
5. दिवाली की रात घर में कितने दीये जलाने चाहिए?
कई परिवारों में 11, 21, 51 या 101 दीपक जलाने की परंपरा है। हालांकि, दीपकों की कोई एक संख्या सभी के लिए अनिवार्य नहीं है। आप अपनी श्रद्धा, उपलब्धता और सुरक्षा के अनुसार दीपक जला सकते हैं।
6. दिवाली की पूजा में कौन सा भोग माता लक्ष्मी को सबसे प्रिय है?
प्रचलित परंपराओं में खील-बताशे, खीर, पेड़ा, अन्य मिठाइयां, फल और नारियल चढ़ाए जाते हैं। कमल का फूल भी माता लक्ष्मी की पूजा में विशेष महत्व रखता है। भोग अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अर्पित करें।
7. क्या किराए के मकान या फ्लैट में भी चौकी बनाकर पूरी पूजा करनी चाहिए?
हां, किराए के मकान या फ्लैट में भी श्रद्धापूर्वक लक्ष्मी-गणेश पूजन किया जा सकता है। उपलब्ध जगह के अनुसार साफ और सुरक्षित स्थान पर चौकी लगाएं। उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा उपलब्ध हो तो उसका उपयोग कर सकते हैं। दिशा से अधिक जरूरी श्रद्धा, स्वच्छता और सुरक्षित व्यवस्था है।
8. क्या दिवाली की पूजा घर पर स्वयं कर सकते हैं?
हां, सामान्य घरेलू लक्ष्मी-गणेश पूजन श्रद्धा और सरल विधि से स्वयं किया जा सकता है। यदि आपके परिवार में कोई विशेष पूजा परंपरा है, तो उसके अनुसार पूजा करें।
9. दिवाली की रात कौन-कौन से मंत्र बोलने चाहिए?
आप भगवान गणेश के लिए “ॐ गं गणपतये नमः”, माता लक्ष्मी के लिए “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” और भगवान कुबेर के लिए “ॐ कुबेराय नमः” मंत्र का जाप कर सकते हैं।
10. क्या दिवाली पर दुकान और ऑफिस में भी लक्ष्मी पूजा की जाती है?
हां, कई व्यापारी और व्यवसायी दिवाली पर दुकान या ऑफिस में लक्ष्मी-गणेश पूजा करते हैं। इस दौरान बहीखाता, कलम और व्यापारिक उपकरणों का भी प्रतीकात्मक पूजन किया जा सकता है।
11. क्या दिवाली पर कुबेर पूजा करना जरूरी है?
कुबेर पूजा कई परिवारों और व्यापारिक समुदायों में प्रचलित है, लेकिन यह सभी परिवारों के लिए अनिवार्य नहीं है। आप अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।
12. दिवाली पूजा के बाद दीयों का क्या करना चाहिए?
दीपक पूरी तरह बुझ जाने और ठंडा हो जाने के बाद ही उन्हें उठाएं। सुरक्षित और उपयोगी मिट्टी के दीपकों को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। टूटे दीपकों को सावधानी से अलग करके उचित तरीके से निपटाएं।
निष्कर्ष
दिवाली पूजा विधि को सही तरीके से समझकर आप घर पर श्रद्धा और सरलता के साथ माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं। इसके लिए पूजा स्थल की सफाई, आवश्यक सामग्री, चौकी स्थापना, मंत्र जाप, भोग और आरती जैसे मुख्य चरणों का पालन करना पर्याप्त है।
यदि आप diwali laxmi puja vidhi, diwali puja kaise kare, simple diwali puja vidhi at home in hindi या deepawali pujan vidhi खोज रहे हैं, तो ऊपर बताए गए चरण आपकी तैयारी में मदद कर सकते हैं।
याद रखें कि पूजा में श्रद्धा, स्वच्छता और सद्भाव का विशेष महत्व है। अपनी पारिवारिक परंपराओं का सम्मान करें और दिवाली मनाते समय दीपकों तथा बिजली की सजावट की सुरक्षा का ध्यान रखें।
आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं! माता लक्ष्मी और भगवान गणेश आपके जीवन में सुख, शांति, सद्बुद्धि और समृद्धि प्रदान करें।








