
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 21 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 21)
बाल्मीकि मुनि बोले, ‘इसके बाद फिर प्रतिभा की अनलोत्तारण क्रिया करके प्राणप्रतिष्ठा
भगवान विष्णु, नारायण, नरसिंह और जगन्नाथ जी की आरती, स्तोत्र, भजन और एकादशी व्रत कथाएँ।

बाल्मीकि मुनि बोले, ‘इसके बाद फिर प्रतिभा की अनलोत्तारण क्रिया करके प्राणप्रतिष्ठा

दृढ़धन्वा राजा बोला, ‘हे तपोधन! पुरुषोत्तम मास के व्रतों के लिए विस्तार

परमा एकादशी का महत्त्व: अर्जुन ने कहा, हे कमलनयन! आपने शुक्ल पक्ष

मणिग्रीव बोला, ‘हे द्विज! विद्वानों से पूर्ण और सुन्दर चमत्कारपुर में धर्मपत्नी

दृढ़धन्वा बोला, ‘हे ब्रह्मन्! हे मुने! अब आप पुरुषोत्तम मास के व्रत

अब उद्यापन के पीछे व्रत के नियम का त्याग कहते हैं। बाल्मीकि

श्रीनारायण बोले, ‘इस प्रकार कह कर मौन हुए मुनिश्वर बाल्मीकि मुनि को

पुण्यशील-सुशील बोले, ‘हे विभो! गोलोक को चलो, यहाँ देरी क्यों करते हो?

सूतजी बोले, ‘राजा परीक्षित् के पूछने पर भगवान् शुक द्वारा कथित परम

श्रीनारायण बोले, ‘हे नारद! भगवान् पुरुषोत्तम के आगे जो शुभ वचन अधिमास

श्रीनारायण बोले, ‘चित्रगुप्त धर्मराज के वचन को सुनकर अपने योद्धाओं से बोले,

नारदजी बोले, ‘हे तपोनिधे! तुमने पहले पतिव्रता स्त्री की प्रशंसा की है

दृढ़धन्वा राजा बोला, ‘हे मुनियों में श्रेष्ठ! हे दीनों पर दया करने

पापांकुशा एकादशी का महत्त्व: अर्जुन कहने लगे कि हे जगदीश्वर! मैंने आश्विन

कान्यकुब्ज (कन्नौज) में एक ब्राम्हण रहता था। उसका नाम अजामिल था। यह

धर्मराज युधिष्ठिर भगवान श्री कृष्ण से कहते हैं: हे भगवन्! आपने वैशाख

योगिनी एकादशी का महत्त्व: हिंदू धर्म ग्रंथों में हर एकादशी का अपना

देवशयनी एकादशी का महत्त्व: ब्रह्म वैवर्त पुराण में देवशयनी एकादशी के विशेष

भगवान् कृष्ण ने जब देह त्याग किया तो उनका अंतिम संस्कार किया

॥ जय श्री हरि ॥ कामिका एकादशी का महत्त्व: अर्जुन ने कहा: