॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ॥
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1 नवंबर 2026, रविवार • रोज़ अपडेट

आज का पंचांग: बेंगलुरु

आज 1 नवंबर 2026, रविवार को बेंगलुरु में कृष्ण सप्तमी तिथि दोपहर 2:52 तक और पुष्य नक्षत्र 2 नवंबर सुबह 4:30 तक है। सूर्योदय सुबह 6:12, सूर्यास्त शाम 5:53 और राहु काल शाम 4:25 से शाम 5:53 तक है।

गणना: जम्भ भक्ति • समय: बेंगलुरु (IST) • लाहिड़ी अयनांश

आज का पंचांग (बेंगलुरु)

तिथिकृष्ण सप्तमी (दोपहर 2:52 तक)
कृष्ण अष्टमी (2 नवंबर, दोपहर 1:11 तक)
नक्षत्रपुष्य (2 नवंबर, सुबह 4:30 तक)
आश्लेषा (3 नवंबर, देर रात 3:46 तक)
योगसाध्य (दोपहर 2:38 तक)
शुभ (2 नवंबर, दोपहर 12:05 तक)
करणबव (दोपहर 2:52 तक)
बालव (2 नवंबर, देर रात 1:59 तक)
कौलव (2 नवंबर, दोपहर 1:11 तक)
वाररविवार
चंद्र राशिकर्क (3 नवंबर, देर रात 3:46 तक)
सूर्य राशितुला
सूर्योदय / सूर्यास्तसुबह 6:12 / शाम 5:53
चंद्रोदय / चंद्रास्त— / दोपहर 12:14

आज के अशुभ समय (बेंगलुरु)

राहु कालशाम 4:25 से शाम 5:53
यमगंडदोपहर 12:03 से दोपहर 1:30
गुलिक कालदोपहर 2:58 से शाम 4:25

आज के शुभ मुहूर्त (बेंगलुरु)

अभिजीत मुहूर्तसुबह 11:39 से दोपहर 12:26
ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:34 से सुबह 5:23

आज का चौघड़िया (बेंगलुरु)

हरे नाम (अमृत, शुभ, लाभ, चर) शुभ और लाल नाम (उद्वेग, काल, रोग) अशुभ माने जाते हैं। अभी चल रहा चौघड़िया हल्के रंग में दिखता है।

दिन का चौघड़िया
दिन का चौघड़ियासमय
उद्वेगसुबह 6:12 से सुबह 7:40
चरसुबह 7:40 से सुबह 9:08
लाभसुबह 9:08 से सुबह 10:35
अमृतसुबह 10:35 से दोपहर 12:03
कालदोपहर 12:03 से दोपहर 1:30
शुभदोपहर 1:30 से दोपहर 2:58
रोगदोपहर 2:58 से शाम 4:25
उद्वेगशाम 4:25 से शाम 5:53
रात का चौघड़िया
रात का चौघड़ियासमय
शुभशाम 5:53 से शाम 7:25
अमृतशाम 7:25 से रात 8:58
चररात 8:58 से रात 10:30
रोगरात 10:30 से देर रात 12:03
कालदेर रात 12:03 से देर रात 1:35
लाभदेर रात 1:35 से देर रात 3:08
उद्वेगदेर रात 3:08 से सुबह 4:40
शुभसुबह 4:40 से सुबह 6:13

सभी समय बेंगलुरु (भारतीय समय) के अनुसार हैं। जम्भ भक्ति की अपनी खगोलीय गणना, लाहिड़ी अयनांश। अपडेट: 1 नवंबर 2026

पंचांग के 5 अंग क्या हैं?

अंगक्या बताता है
तिथिचंद्रमा सूर्य से कितना आगे है। हर 12 अंश पर तिथि बदलती है, महीने में 30 तिथियाँ होती हैं।
वारसप्ताह का दिन। हिंदू पंचांग में वार सूर्योदय से सूर्योदय तक माना जाता है।
नक्षत्रचंद्रमा 27 नक्षत्रों में से किसमें है। नक्षत्र लगभग एक दिन में बदलता है।
योगसूर्य और चंद्रमा के स्थान का जोड़। ये भी 27 होते हैं।
करणतिथि का आधा भाग। कुल 11 करण होते हैं, विष्टि करण को भद्रा कहते हैं।

पंचांग देखकर काम कैसे चुनें?

नया काम शुरू करने से पहले राहु काल देखकर उससे बचा जाता है, और चौघड़िया में अमृत, शुभ या लाभ का समय चुना जाता है। पूजा-पाठ के लिए ब्रह्म मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त अच्छे माने जाते हैं। व्रत की तारीखें एकादशी, अमावस्या और पूर्णिमा की सूचियों में देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आज कौन सी तिथि और नक्षत्र है?

पेज के सबसे ऊपर आज की तिथि, नक्षत्र और उनके खत्म होने का समय दिया है। यह जानकारी हर रात 12 बजे अपने आप अगले दिन की हो जाती है।

पंचांग के 5 अंग कौन से हैं?

पंचांग के पाँच अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण हैं। इन्हीं पाँच अंगों से किसी दिन का पूरा पंचांग बनता है।

नक्षत्र कितने होते हैं?

नक्षत्र 27 होते हैं। चंद्रमा का रास्ता 27 बराबर हिस्सों में बँटा है और हर हिस्सा 13 अंश 20 कला का होता है। चंद्रमा जिस हिस्से में हो, वही उस समय का नक्षत्र है।

योग कितने होते हैं?

योग भी 27 होते हैं। सूर्य और चंद्रमा के स्थान को जोड़कर 13 अंश 20 कला के हिस्सों में बाँटा जाता है, उसी से योग निकलता है।

करण क्या होता है?

करण तिथि का आधा हिस्सा है, इसलिए हर तिथि में दो करण होते हैं। कुल 11 करण हैं, जिनमें 7 बार-बार आते हैं और 4 महीने में एक बार। विष्टि करण को भद्रा भी कहते हैं।

आज राहु काल कब है?

आज का राहु काल पेज के ऊपर दिया है। अपने शहर पर क्लिक करके वहाँ का सही समय देखें।

अलग-अलग शहरों का पंचांग अलग क्यों होता है?

तिथि, नक्षत्र और योग पूरे भारत में एक ही समय पर बदलते हैं, लेकिन सूर्योदय और सूर्यास्त हर शहर में अलग होते हैं। राहु काल, चौघड़िया और मुहूर्त सूर्योदय-सूर्यास्त से निकलते हैं, इसलिए ये हर शहर में अलग होते हैं। बीकानेर और जोधपुर में सूर्योदय दिल्ली से लगभग 10-15 मिनट बाद होता है।

चंद्र राशि क्या होती है?

चंद्रमा जिस राशि में होता है, उसे चंद्र राशि कहते हैं। चंद्रमा लगभग सवा दो दिन में राशि बदलता है।

यह पंचांग कैसे बनता है? जम्भ भक्ति किसी दूसरी वेबसाइट से पंचांग कॉपी नहीं करता। सूर्य और चंद्रमा की स्थिति खगोलीय गणित (एफ़ेमेरिस) से निकाली जाती है, नक्षत्र और राशि के लिए लाहिड़ी अयनांश लिया जाता है, और सूर्योदय-सूर्यास्त हर शहर के अक्षांश-देशांतर से निकाले जाते हैं। तिथि, नक्षत्र, योग, राहु काल और अभिजीत मुहूर्त के समय को प्रचलित पंचांगों से मिलाकर जाँचा गया है, जिनमें अंतर आमतौर पर 1-2 मिनट का रहा। बड़े मुहूर्त के लिए अपने स्थानीय पंडित या पंचांग से भी मिला लें। कोई गलती दिखे तो हमें बताएँ।

यह भी देखें

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