
श्री दुर्गा के 108 नाम (Shri Durga 108 Name)
1. सती- अग्नि में जल कर भी जीवित होने वाली 2. साध्वी-

1. सती- अग्नि में जल कर भी जीवित होने वाली 2. साध्वी-

श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्र मे देवी महालक्ष्मी को आठ रूपों में पूजा जाता

श्री महालक्ष्म्यष्टकम् इंद्र देव द्वारा माता महालक्ष्मी की भक्तिपूर्ण स्तुति है, जिसे

❀ सामूहिक कल्याण के लिये मंत्र – देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्र्या

भाग्यद लक्ष्मी बारम्मा । नम्मम्म नी सौभाग्यद लक्ष्मी बारम्मा ॥ हेज्जेय मेले

ॐ महालक्ष्मयै नमः ॐ महालक्ष्मयै नमः ॐ महालक्ष्मयै नमः ॐ महालक्ष्मयै नमः

जय दुर्गे जय दुर्गे, महिषविमर्दिनी जय दुर्गे । जय दुर्गे जय दुर्गे,

॥अथ अग्निहोत्रमंत्र:॥ » जल से आचमन करने के 3 मंत्र ॐ अमृतोपस्तरणमसि

ध्यान दें- श्री विद्या मंत्र दीक्षित व्यक्ति इस सहस्रनाम करने के अधिकारी

नमामि यमुनामहं सकल सिद्धि हेतुं मुदा मुरारि पद पंकज स्फ़ुरदमन्द रेणुत्कटाम ।

विनियोग: अस्य श्रीरामरक्षास्त्रोतमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः । श्री सीतारामचंद्रो देवता । अनुष्टुप छंदः।

माँ दुर्गा की पूजा समाप्ति पर करें ये स्तुति, तथा पूजा में

देवी कवच | श्री दुर्गा कवच कवच का अर्थ होता है रक्षा

णमोकार मंत्र है न्यारा, इसने लाखों को तारा। इस महा मंत्र का

शिवा दुति स्वरूपेण हत दैत्य महाबले, घोरा रुपे महा रावे भैरवी नमोस्तुते

प्रथम पुष्पांजली मंत्र ॐ जयन्ती, मङ्गला, काली, भद्रकाली, कपालिनी । दुर्गा, शिवा,

॥ दुर्गा सप्तशती: सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् ॥ शिव उवाच: शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम् ।

आदित्यहृदयम् सूर्य देव की स्तुति के लिए वाल्मीकि रामायण के युद्ध काण्ड

श्री शुक उवाच – एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो हृदि । जजाप

अहं ब्रह्मास्मि महावाक्य का शाब्दिक अर्थ है मैं ब्रह्म हूँ, यहाँ ‘अस्मि’