
कार्तिक मास माहात्म्य कथा: अध्याय 20 (Kartik Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 20)
माँ शारदा की प्रेरणा, स्वयं सहाय । कार्तिक माहात्म का लिखूं, यह

माँ शारदा की प्रेरणा, स्वयं सहाय । कार्तिक माहात्म का लिखूं, यह

कार्तिक मास माहात्म्य का, यह इकत्तीसवाँ अध्याय । बतलाया भगवान ने, प्रभु

मुझे सहारा है तेरा, सब जग के पालनहार । कार्तिक मास के

दया दृष्टि कर हृदय में, भव भक्ति उपजाओ। तैंतीसवाँ अध्याय लिखूँ, कृपादृष्टि

सूतजी ने ऋषियों से, कहा प्रसंग बखान । चौंतीसवें अध्याय पर, दया

अनुपम कथा कार्तिक, होती है सम्पन्न । इसको पढ़ने से, श्रीहरि होते

सुना प्रश्न ऋषियों का, और बोले सूतजी ज्ञानी । पच्चीसवें अध्याय में

कान्यकुब्ज (कन्नौज) में एक ब्राम्हण रहता था। उसका नाम अजामिल था। यह

गज और असुर के संयोग से एक असुर जन्मा था, गजासुर। उसका

महाभारत महाकाव्य, में एक प्रसंग के अनुसार नल और दमयन्ती की कथा

विवाह के कार्ड पे लडके के नाम के आगे-चिरंजीव तथा लडकी के

कहते है, जब भगवान राम दशानन रावण को मार कर अयोध्या लौट

एक बुढ़िया थी, उस बुढ़िया का एक बेटा था जिसका नाम था

पौराणिक मतानुसार एक बार भगवान विष्णु देवाधिदेव महादेव का पूजन करने के

धर्मराज युधिष्ठिर भगवान श्री कृष्ण से कहते हैं: हे भगवन्! आपने वैशाख

विवाहित महिलाओं के बीच अत्यधिक प्रचलित ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या के दिन आने

योगिनी एकादशी का महत्त्व: हिंदू धर्म ग्रंथों में हर एकादशी का अपना

विजया पार्वती व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार किसी समय कौडिन्य नगर

देवशयनी एकादशी का महत्त्व: ब्रह्म वैवर्त पुराण में देवशयनी एकादशी के विशेष

भगवान् कृष्ण ने जब देह त्याग किया तो उनका अंतिम संस्कार किया