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मांगलिक दोष: जन्म तारीख से जानें आप मांगलिक हैं या नहीं

मांगलिक दोष तब माना जाता है जब जन्म कुंडली में मंगल लग्न या चंद्र राशि से पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो। नीचे जन्म तारीख, समय और स्थान भरें। यह मुफ़्त टूल तुरंत बताएगा कि आप मांगलिक हैं या नहीं, मंगल किस भाव में है और कौन से परिहार लागू हो सकते हैं।

अपडेट: 1 नवंबर 2026 • गणना: जम्भ भक्ति • पद्धति: लाहिड़ी अयनांश
इस टूल से मिलेगा
मांगलिक: हाँ या नहीं
लग्न, चंद्र और शुक्र से मंगल का भाव
परिहार के संकेत भी
नीचे फ़ॉर्म भरें ↓
5भाव जिनसे दोष बनता है
3लग्न, चंद्र और शुक्र से जाँच
₹0पूरी तरह मुफ़्त
फ़ोन परगणना, कुछ सेव नहीं

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किस भाव में मंगल हो तो मांगलिक दोष बनता है?

भावभाव का विषयपरंपरा में क्यों देखा जाता है
पहलाशरीर और स्वभावमंगल का तेज़ स्वभाव व्यक्ति के व्यवहार में गुस्सा और जल्दबाज़ी ला सकता है, ऐसा माना जाता है।
चौथाघर और सुखघर की शांति और पारिवारिक सुख पर असर माना जाता है।
सातवाँविवाह और जीवनसाथीयह सीधे विवाह का भाव है, इसलिए यहाँ मंगल को सबसे ज़्यादा देखा जाता है।
आठवाँआयु और अचानक घटनाएँवैवाहिक जीवन में अचानक उतार-चढ़ाव से जोड़ा जाता है।
बारहवाँशय्या सुख और खर्चदांपत्य सुख और खर्चों पर असर माना जाता है।

दक्षिण भारत की कुछ परंपराओं में दूसरे भाव (परिवार और वाणी) का मंगल भी मांगलिक माना जाता है। कुछ ज्योतिषी लग्न और चंद्र के साथ शुक्र से भी मंगल का भाव देखते हैं, इसलिए टूल यह भी दिखाता है।

मांगलिक दोष का परिहार (काट) कब माना जाता है?

पारंपरिक ग्रंथों और ज्योतिषियों के बीच ये परिहार सबसे ज़्यादा माने जाते हैं:

  • वर और वधू दोनों मांगलिक हों तो दोष आपस में कट जाता है।
  • मंगल अपनी राशि (मेष या वृश्चिक) या उच्च राशि (मकर) में हो।
  • मंगल पर गुरु की युति या दृष्टि हो।
  • दूसरे जीवनसाथी की कुंडली में उन्हीं भावों में शनि, राहु या केतु हों (कई परंपराओं में)।
  • कई ग्रंथ भाव और राशि के कुछ खास मेल पर भी छूट देते हैं, जिनकी जाँच ज्योतिषी पूरी कुंडली देखकर करते हैं।

टूल पहले तीन तरह के संकेत अपने आप दिखाता है। बाकी के लिए दोनों की कुंडली साथ में देखनी होती है, जिसके लिए कुंडली मिलान टूल काम आएगा।

मांगलिक होने पर क्या करें?

घबराने की ज़रूरत नहीं है। मंगल 12 में से 5 भावों में हो तो दोष माना जाता है, इसलिए केवल लग्न से ही लगभग 40 प्रतिशत लोगों की कुंडली में यह योग बनता है, और चंद्र राशि से भी देखें तो इससे भी ज़्यादा। मांगलिक होना अपने आप में कोई अशुभ बात नहीं है।

  1. पहले देखें कि दोष लग्न और चंद्र दोनों से है या केवल एक से। केवल एक से होने पर कई ज्योतिषी इसे आंशिक मांगलिक मानते हैं।
  2. ऊपर दिए परिहार के संकेत देखें।
  3. विवाह से पहले दोनों की कुंडली का गुण मिलान करें और योग्य ज्योतिषी से पूरी कुंडली दिखाएँ।
  4. डर या महँगे उपायों के दबाव में जल्दबाज़ी में फैसला न लें। परंपरा में श्रद्धा से की गई पूजा और व्रत को ही मुख्य उपाय माना गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मांगलिक दोष क्या होता है?

जब जन्म कुंडली में मंगल लग्न या चंद्र राशि से पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो, तो उसे मांगलिक दोष या मंगल दोष कहते हैं। परंपरा में विवाह से पहले इसे देखा जाता है।

कैसे पता करें कि मैं मांगलिक हूँ या नहीं?

ऊपर के टूल में अपनी जन्म तारीख, सही जन्म समय और जन्म स्थान डालें। टूल लग्न, चंद्र राशि और शुक्र से मंगल का भाव निकालकर तुरंत बता देगा।

क्या 28 साल के बाद मांगलिक दोष खत्म हो जाता है?

यह एक प्रचलित मान्यता है, क्योंकि मंगल की परिपक्वता की उम्र 28 साल मानी जाती है। लेकिन कुंडली में मंगल की स्थिति उम्र से नहीं बदलती, इसलिए ज़्यादातर ज्योतिषी परिहार के लिए पूरी कुंडली ही देखते हैं।

आंशिक मांगलिक किसे कहते हैं?

जब मंगल केवल लग्न से या केवल चंद्र राशि से दोष वाले भाव में हो, या दोष के साथ कोई परिहार भी हो, तो कई ज्योतिषी इसे आंशिक या हल्का मांगलिक दोष कहते हैं।

क्या मांगलिक और गैर-मांगलिक की शादी हो सकती है?

हाँ, ऐसी बहुत शादियाँ होती हैं। परंपरा में ज्योतिषी दूसरे जीवनसाथी की कुंडली में परिहार देखते हैं, जैसे उन्हीं भावों में शनि, राहु या केतु का होना।

क्या चंद्र राशि से भी मांगलिक दोष देखा जाता है?

हाँ। उत्तर भारत में आमतौर पर लग्न और चंद्र राशि दोनों से मंगल का भाव देखा जाता है। टूल दोनों के नतीजे अलग-अलग दिखाता है।

दूसरी वेबसाइट अलग नतीजा क्यों देती है?

कुछ जगह केवल लग्न से देखा जाता है, कुछ दूसरा भाव भी जोड़ती हैं और कुछ शुक्र से भी देखती हैं। जन्म समय में गलती से लग्न बदलने पर भी नतीजा बदल सकता है।

जन्म समय पता न हो तो मांगलिक दोष कैसे देखें?

बिना समय के लग्न सही नहीं निकलता, इसलिए लग्न वाला नतीजा भरोसेमंद नहीं होगा। चंद्र राशि से देखा गया नतीजा ज़्यादातर सही रहता है।

क्या मेरी जानकारी सेव होती है?

नहीं। गणना आपके ब्राउज़र में ही होती है और जन्म विवरण कहीं नहीं भेजा जाता।

मांगलिक दोष कैसे निकाला जाता है? ग्रहों की स्थिति खुले स्रोत (MIT लाइसेंस) की खगोलीय गणना लाइब्रेरी Astronomy Engine से आपके ब्राउज़र में ही निकाली जाती है। हमने इसे दूसरी एफ़ेमेरिस (PyEphem) से जाँचा है: ग्रहों और लग्न में अंतर 0.01 अंश से कम रहा। निरयण स्थिति के लिए लाहिड़ी (चित्रापक्ष) अयनांश लिया गया है। भाव पूरी राशि की पद्धति से गिने जाते हैं। लग्न, चंद्र राशि और शुक्र से मंगल पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में होने पर दोष दिखाया जाता है। परिहार के संकेत में मंगल की अपनी या उच्च राशि और गुरु की युति या दृष्टि (गुरु से मंगल पहले, पाँचवें, सातवें या नौवें भाव में) देखी जाती है। कोई गलती दिखे तो हमें बताएँ।

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