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मुफ़्त ज्योतिष टूल • हिंदी में • रजिस्ट्रेशन नहीं

जन्म कुंडली ऑनलाइन: मुफ़्त कुंडली बनाएँ, ग्रह और महादशा के साथ

जन्म कुंडली जन्म के समय आकाश में ग्रहों की स्थिति का नक्शा है। नीचे जन्म तारीख, समय और स्थान भरें। यह मुफ़्त टूल तुरंत लग्न, चंद्र राशि, नक्षत्र, नाम अक्षर, नौ ग्रहों की राशि और भाव, उत्तर भारतीय कुंडली चार्ट और विंशोत्तरी महादशा बता देगा। सारी गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

अपडेट: 1 नवंबर 2026 • गणना: जम्भ भक्ति • पद्धति: लाहिड़ी अयनांश
इस टूल से मिलेगा
कुंडली चार्ट
लग्न, राशि, नक्षत्र, 9 ग्रह
विंशोत्तरी महादशा और अंतर्दशा भी
नीचे फ़ॉर्म भरें ↓
9ग्रहों की राशि और भाव
12भावों का कुंडली चार्ट
120 सालकी विंशोत्तरी महादशा
₹0पूरी तरह मुफ़्त

अपनी जन्म कुंडली बनाएँ

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जन्म कुंडली में क्या-क्या दिखता है?

हिस्साइसका मतलब
लग्नजन्म के समय पूर्व दिशा में उदय हो रही राशि। यही कुंडली का पहला भाव है और बाकी 11 भाव इसी से गिने जाते हैं।
चंद्र राशिजन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था। राशिफल, गोचर और गुण मिलान इसी राशि से देखे जाते हैं।
जन्म नक्षत्र और चरणचंद्रमा का नक्षत्र और उसका चरण। इसी से नाम का पहला अक्षर और महादशा की शुरुआत तय होती है।
ग्रह स्थितिसूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु किस राशि, अंश, नक्षत्र और भाव में हैं।
वक्री ग्रहजो ग्रह पृथ्वी से देखने पर कुछ समय उल्टी चाल चलते दिखते हैं। राहु-केतु हमेशा वक्री माने जाते हैं।
विंशोत्तरी महादशा120 साल का ग्रह-काल चक्र। हर समय किसी एक ग्रह की महादशा और उसके अंदर अंतर्दशा चलती है।
मांगलिकमंगल लग्न या चंद्र राशि से पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में है या नहीं।

उत्तर भारतीय कुंडली चार्ट कैसे पढ़ें?

  1. ऊपर बीच वाला हीरे जैसा खाना पहला भाव (लग्न) है।
  2. यहाँ से घड़ी की उल्टी दिशा में, यानी बाईं ओर चलते हुए दूसरा, तीसरा और आगे बारहवें भाव तक गिनें। भावों की जगह हर कुंडली में एक जैसी रहती है।
  3. हर खाने में लिखी छोटी संख्या राशि बताती है: 1 मेष, 2 वृषभ, 3 मिथुन से 12 मीन तक। लग्न बदलने पर राशियों की संख्या बदल जाती है।
  4. खानों में लिखे छोटे नाम ग्रह हैं: सू सूर्य, चं चंद्र, मं मंगल, बु बुध, गु गुरु, शु शुक्र, श शनि, रा राहु, के केतु। (व) का मतलब वक्री ग्रह है।

कुंडली के 12 भाव किस बारे में बताते हैं?

परंपरा में हर भाव जीवन के कुछ खास विषयों से जुड़ा माना जाता है:

भावनाममुख्य विषय
1तनु भावशरीर, स्वभाव, व्यक्तित्व
2धन भावधन, परिवार, वाणी
3सहज भावछोटे भाई-बहन, साहस, मेहनत
4सुख भावमाता, घर, वाहन, मन की शांति
5पुत्र भावसंतान, बुद्धि, शिक्षा
6रिपु भावरोग, कर्ज़, शत्रु, प्रतियोगिता
7जाया भावविवाह, जीवनसाथी, साझेदारी
8आयु भावआयु, अचानक बदलाव, गुप्त बातें
9धर्म भावभाग्य, पिता, धर्म, लंबी यात्रा
10कर्म भावकाम-धंधा, पद, मान-सम्मान
11लाभ भावआय, लाभ, बड़े भाई-बहन, इच्छापूर्ति
12व्यय भावखर्च, विदेश, मोक्ष

विंशोत्तरी महादशा क्या है?

विंशोत्तरी दशा में नौ ग्रहों की महादशाएँ एक तय क्रम में आती हैं और सबका कुल समय 120 साल है। जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उसी नक्षत्र के स्वामी ग्रह से पहली महादशा शुरू होती है। चंद्रमा उस नक्षत्र का जितना हिस्सा पार कर चुका होता है, पहली महादशा का उतना हिस्सा जन्म से पहले ही बीत चुका माना जाता है।

क्रममहादशाकितने साल
1केतु7 साल
2शुक्र20 साल
3सूर्य6 साल
4चंद्र10 साल
5मंगल7 साल
6राहु18 साल
7गुरु16 साल
8शनि19 साल
9बुध17 साल
कुल120 साल

सही कुंडली के लिए जन्म समय क्यों ज़रूरी है?

लग्न लगभग हर 2 घंटे में बदल जाता है, इसलिए जन्म समय में 10-15 मिनट की गलती से भी लग्न और भावों में ग्रह बदल सकते हैं। चंद्रमा लगभग एक दिन में नक्षत्र और सवा दो दिन में राशि बदलता है, इसलिए चंद्र राशि और नक्षत्र पर समय की छोटी गलती का असर कम पड़ता है, जब तक उसी समय के आसपास चंद्रमा ने नक्षत्र न बदला हो। जन्म प्रमाणपत्र या अस्पताल के रिकॉर्ड का समय सबसे भरोसेमंद होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जन्म कुंडली बनाने के लिए क्या चाहिए?

जन्म तारीख, सही जन्म समय और जन्म स्थान। समय भारतीय मानक समय (IST) में डालें। जन्म स्थान सूची में न हो तो “दूसरा स्थान” चुनकर उसका अक्षांश और देशांतर डालें।

क्या यह कुंडली पूरी तरह मुफ़्त है?

हाँ। जम्भ भक्ति की कुंडली पूरी तरह मुफ़्त है। कोई रजिस्ट्रेशन, मोबाइल नंबर या ईमेल नहीं माँगा जाता।

क्या मेरी जन्म की जानकारी कहीं सेव होती है?

नहीं। कुंडली की पूरी गणना आपके फ़ोन या कंप्यूटर के ब्राउज़र में होती है। आपकी जन्म तारीख, समय और स्थान हमारे सर्वर पर नहीं भेजे जाते।

जन्म समय नहीं पता हो तो क्या करें?

बिना सही समय के लग्न और भाव गलत हो सकते हैं। चंद्र राशि और नक्षत्र ज़्यादातर सही आते हैं। नक्षत्र से नाम का अक्षर जानना हो तो नाम अक्षर टूल देखें।

लग्न और राशि में क्या फर्क है?

लग्न वह राशि है जो जन्म के समय पूर्व दिशा में उदय हो रही थी, जबकि राशि (चंद्र राशि) वह है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था। लग्न हर 2 घंटे में बदलता है, चंद्र राशि लगभग सवा दो दिन में।

यह कुंडली किस पद्धति से बनती है?

यह निरयण (सिडेरियल) कुंडली है, जिसमें लाहिड़ी अयनांश लिया गया है। भाव पूरी राशि के हिसाब से (एक राशि एक भाव) और चार्ट उत्तर भारतीय शैली में बनता है।

दूसरे सॉफ़्टवेयर से ग्रहों के अंश में थोड़ा अंतर क्यों दिखता है?

अलग सॉफ़्टवेयर अलग अयनांश, स्पष्ट या माध्य राहु और दशा के साल की अलग लंबाई लेते हैं। इससे कुछ कला का अंतर और महादशा की तारीखों में कुछ दिनों का अंतर आ सकता है।

भारत के बाहर जन्म हो तो कुंडली कैसे बनाएँ?

“दूसरा स्थान” चुनें, फिर जन्म स्थान का अक्षांश, देशांतर और वहाँ का समय क्षेत्र (UTC से घंटे) डालें, जैसे लंदन के लिए 0 या 1, न्यूयॉर्क के लिए -5 या -4। जन्म समय वहीं का स्थानीय समय डालें।

महादशा और अंतर्दशा क्या होती है?

महादशा किसी एक ग्रह का लंबा समय है, जैसे शुक्र की 20 साल। हर महादशा के अंदर नौ ग्रहों की छोटी अंतर्दशाएँ चलती हैं। टूल अभी चल रही महादशा और अंतर्दशा अलग रंग में दिखाता है।

क्या कुंडली से भविष्य पक्का पता चलता है?

कुंडली जन्म के समय ग्रहों की सटीक स्थिति दिखाती है, लेकिन उसका फलादेश ज्योतिष परंपरा और आस्था का विषय है। ज़रूरी फैसलों में योग्य ज्योतिषी की सलाह के साथ अपनी समझ और परिवार की राय भी लें।

यह कुंडली कैसे बनती है? ग्रहों की स्थिति खुले स्रोत (MIT लाइसेंस) की खगोलीय गणना लाइब्रेरी Astronomy Engine से आपके ब्राउज़र में ही निकाली जाती है। हमने इसे दूसरी एफ़ेमेरिस (PyEphem) से जाँचा है: ग्रहों और लग्न में अंतर 0.01 अंश से कम रहा। निरयण स्थिति के लिए लाहिड़ी (चित्रापक्ष) अयनांश लिया गया है। राहु-केतु माध्य गति से, भाव पूरी राशि की पद्धति से और विंशोत्तरी दशा में एक साल 365.25 दिन का लिया गया है। लग्न जन्म स्थान के अक्षांश-देशांतर और स्थानीय नाक्षत्र समय से निकाला जाता है। कोई गलती दिखे तो हमें बताएँ।

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