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ज्योतिष और पंचांग • नवंबर 2026 से दिसंबर 2027

संक्रांति 2027: मकर संक्रांति, सभी 12 संक्रांति और खरमास

2027 में मकर संक्रांति 15 जनवरी 2027, शुक्रवार को है, क्योंकि सूर्य 14 जनवरी 2027, रात 8:56 पर मकर राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य हर महीने राशि बदलता है, इसलिए साल में 12 संक्रांति होती हैं। 2027 में खरमास 15 मार्च से 14 अप्रैल तक और 16 दिसंबर से अगले साल की मकर संक्रांति तक रहेगा।

अपडेट: 1 नवंबर 2026 • गणना: जम्भ भक्ति • समय: नई दिल्ली (IST)
अगली संक्रांति
17 नवंबर 2026, मंगलवार
वृश्चिक संक्रांति
16 नवंबर 2026, शाम 7:28
नीचे पूरी लिस्ट
12संक्रांति हर साल
15 जनवरीमकर संक्रांति 2027
14 अप्रैलबैसाखी 2027
2 बारखरमास 2027 में
साल चुनें:20262027

संक्रांति लिस्ट 2026

पर्व की तारीखसंक्रांतिसूर्य का राशि प्रवेश
नवंबर 2026
17नवंमंगलवार
नवंबर 2026
वृश्चिक संक्रांतिसूर्य वृश्चिक राशि में
16 नवंबर 2026, शाम 7:28
दिसंबर 2026
16दिसंबुधवार
दिसंबर 2026
धनु संक्रांतिसूर्य धनु राशि में
16 दिसंबर 2026, सुबह 10:10

संक्रांति लिस्ट 2027

पर्व की तारीखसंक्रांतिसूर्य का राशि प्रवेश
जनवरी 2027
15जनशुक्रवार
जनवरी 2027
मकर संक्रांति (पोंगल, उत्तरायण)सूर्य मकर राशि में
14 जनवरी 2027, रात 8:56
फ़रवरी 2027
13फ़रशनिवार
फ़रवरी 2027
कुंभ संक्रांतिसूर्य कुंभ राशि में
13 फ़रवरी 2027, सुबह 9:54
मार्च 2027
15मार्चसोमवार
मार्च 2027
मीन संक्रांतिसूर्य मीन राशि में
15 मार्च 2027, सुबह 6:45
अप्रैल 2027
14अप्रैबुधवार
अप्रैल 2027
मेष संक्रांति (बैसाखी)सूर्य मेष राशि में
14 अप्रैल 2027, दोपहर 3:13
मई 2027
15मईशनिवार
मई 2027
वृषभ संक्रांतिसूर्य वृषभ राशि में
15 मई 2027, दोपहर 12:05
जून 2027
15जूनमंगलवार
जून 2027
मिथुन संक्रांतिसूर्य मिथुन राशि में
15 जून 2027, शाम 6:41
जुलाई 2027
17जुलाशनिवार
जुलाई 2027
कर्क संक्रांति (दक्षिणायन शुरू)सूर्य कर्क राशि में
17 जुलाई 2027, सुबह 5:34
अगस्त 2027
17अगमंगलवार
अगस्त 2027
सिंह संक्रांतिसूर्य सिंह राशि में
17 अगस्त 2027, दोपहर 1:59
सितंबर 2027
17सितशुक्रवार
सितंबर 2027
कन्या संक्रांतिसूर्य कन्या राशि में
17 सितंबर 2027, दोपहर 1:56
अक्टूबर 2027
18अक्टूसोमवार
अक्टूबर 2027
तुला संक्रांतिसूर्य तुला राशि में
18 अक्टूबर 2027, देर रात 1:54
नवंबर 2027
17नवंबुधवार
नवंबर 2027
वृश्चिक संक्रांतिसूर्य वृश्चिक राशि में
17 नवंबर 2027, देर रात 1:44
दिसंबर 2027
16दिसंगुरुवार
दिसंबर 2027
धनु संक्रांतिसूर्य धनु राशि में
16 दिसंबर 2027, शाम 4:24

खरमास 2026-27 कब से कब तक है?

जब सूर्य धनु या मीन राशि में होता है, उस लगभग एक महीने को खरमास (मलमास) कहते हैं। परंपरा में इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे संस्कार नहीं किए जाते।

खरमासशुरूखत्म
धनु खरमास16 दिसंबर 2026, बुधवार15 जनवरी 2027, शुक्रवार (मकर संक्रांति)
मीन खरमास15 मार्च 2027, सोमवार14 अप्रैल 2027, बुधवार (मेष संक्रांति)
धनु खरमास16 दिसंबर 2027, गुरुवारजनवरी 2028 (मकर संक्रांति)

संक्रांति का पर्व किस दिन मनाया जाता है?

सूर्य जिस समय नई राशि में जाता है, उस समय से पहले और बाद का समय पुण्य काल माना जाता है। अगर सूर्य का राशि प्रवेश सूर्यास्त के बाद हो, तो संक्रांति का स्नान-दान अगले दिन किया जाता है। इसी नियम से इस लिस्ट में पर्व की तारीख दी गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2027 में मकर संक्रांति कब है?

मकर संक्रांति 15 जनवरी 2027, शुक्रवार को है। सूर्य 14 जनवरी 2027, रात 8:56 पर मकर राशि में प्रवेश करेगा।

2027 में खरमास कब से कब तक है?

2027 में मीन खरमास 15 मार्च 2027, सोमवार से 14 अप्रैल 2027, बुधवार तक और धनु खरमास 16 दिसंबर 2027, गुरुवार से जनवरी 2028 की मकर संक्रांति तक रहेगा।

साल में कितनी संक्रांति होती हैं?

सूर्य हर महीने एक राशि बदलता है, इसलिए साल में 12 संक्रांति होती हैं। इनमें मकर संक्रांति सबसे बड़ी मानी जाती है।

मकर संक्रांति कभी 14 और कभी 15 जनवरी को क्यों होती है?

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश हर साल लगभग 6 घंटे आगे खिसकता है। अगर प्रवेश सूर्यास्त के बाद हो, तो पर्व अगले दिन मनाया जाता है। इसलिए तारीख 14 या 15 जनवरी हो जाती है।

खरमास में क्या नहीं करना चाहिए?

परंपरा में खरमास में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन और नया व्यापार शुरू करने जैसे शुभ काम नहीं किए जाते। पूजा-पाठ, दान और तीर्थ यात्रा की जा सकती है।

बैसाखी 2027 कब है?

बैसाखी मेष संक्रांति के दिन मनाई जाती है, जो 2027 में 14 अप्रैल 2027, बुधवार को है।

संक्रांति पर क्या दान करें?

संक्रांति पर स्नान के बाद तिल, गुड़, अन्न, कंबल और वस्त्र का दान किया जाता है। मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ का खास महत्व है।

संक्रांति का समय किस शहर का है?

सूर्य का राशि प्रवेश पूरे भारत में एक ही समय पर होता है। सिर्फ यह तय करने के लिए कि पर्व उसी दिन होगा या अगले दिन, नई दिल्ली का सूर्यास्त लिया गया है।

ये तारीखें कैसे निकाली गईं? जम्भ भक्ति किसी दूसरी वेबसाइट से तारीखें कॉपी नहीं करता। सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की स्थिति खगोलीय गणित (एफ़ेमेरिस) से और नक्षत्र-राशि लाहिड़ी अयनांश से निकाली गई है। व्रत-त्योहार का दिन धर्मशास्त्र के नियमों (उदया तिथि, मध्याह्न, अपराह्न, प्रदोष, निशीथ काल, चंद्रोदय) से तय किया गया है। संक्रांति का समय सूर्य के निरयन (लाहिड़ी) राशि प्रवेश से निकाला गया है। सभी समय नई दिल्ली के हैं, आपके शहर में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। कोई गलती दिखे तो हमें बताएँ।

यह भी देखें