
चरण कमल तेरे धोए धोए पीवां – शब्द कीर्तन (Charan Kamal Tere Dhoye Dhoye Peevan)
सिमर सिमर नाम जीवा तन मन होए निहाला, चरण कमल तेरे धोए धोए पीवां मेरे सतगुरु दीन दयाला चरण कमल तेरे धोए धोए पीवां मेरे

सिमर सिमर नाम जीवा तन मन होए निहाला, चरण कमल तेरे धोए धोए पीवां मेरे सतगुरु दीन दयाला चरण कमल तेरे धोए धोए पीवां मेरे

गणपति तुम सब गण के राजा, गणपति तुम सब गण के राजा, पूरण करो हमारे काज, पूरण करो हमारे काज, गणपति तूम सब गण के

ओ गणनायक महाराज सुमिरा जोडू दोनों हाथ, ओ गणनायक महाराज, सुमिरा जोडू दोनों हाथ, गजानंद मैहर करो, गजानन मैहर करो ॥ एकदंत है दयावंत है,

छत्रधारी छत्रपति छैल रूप छितनाथ छौनी कर छाया बर छत्रीपत गाईइ राजन के राजा महाराजन के महाराजा ऐसा राज्य छोड़ और दूजा कौन धियाएई राजन

सो सतगुरु प्यारा मेरे नाल है, जिथे किथे मैनु लै छडाई तिस गुरु कौ हौ वारिया, जिन हर की हर कथा सुनाई, तिस गुरु को

गौरी गणेश मनाऊँ, आज सुध लीजे हमारी, गौरी गणेश मनाऊँ, आज सुध लीजे हमारी । सुरहिन गैया को गोबर मनागौं, दिग धर अगना लीपाऊं, आज

बिसर गई सब तात पराई, जब ते साध संगत मोहे पाई, ना कोई बैरी नहीं बेगाना, सगल संग हमको बन आई, बिसर गई सब तात
