
शिव शम्भू सा निराला, कोई देवता नहीं है – भजन (Shiv Shambhu Sa Nirala Koi Devta Nahi Hai)
शिव शम्भू सा निराला, कोई देवता नहीं है, जैसा भी है डमरू वाला, कोई देवता नहीं है ॥ सर पे बसी है गंगा, माथे पे

शिव शम्भू सा निराला, कोई देवता नहीं है, जैसा भी है डमरू वाला, कोई देवता नहीं है ॥ सर पे बसी है गंगा, माथे पे

हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ, आरती उतारूँ प्यारे तुमको मनाऊँ, अवध बिहारी तेरी आरती उतारूँ, हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ ॥ कनक सिहासन

राम आ गए, धन्य भाग्य शबरी हर्षाए ॥ आँखों में प्रेम आंसू, चरणों को धो रही है, मारे ख़ुशी के शबरी, व्याकुल सी हो रही

राम दरबार है जग सारा, राम ही तीनो लोक के राजा, सबके प्रतिपाला सबके आधारा, राम दरबार हैं जग सारा ॥ राम का भेद ना

राम पे जब जब विपदा आई, कौन बना रखवाला, राम पे जब जब विपदा आई, कौन बना रखवाला, मेरा बजरंग बाला, मेरा बजरंग बाला ।

सब कुछ मिला रे भोले, रहमत से तेरी तूने ही है सुनी इल्तिज़ा मेरी । बन के फ़कीर मैं चला राह में तेरी तू न

बम भोले बम भोले कैलाश का वासी, बम भोले मिलता है जो काशी, बम भोले धमारू पर नाचे झूम-झूम कर दूर उदासी, बम भोले मन
