
म्हारा घट मा बिराजता श्रीनाथजी: भजन (Mara Ghat Ma Birajta Shrinathji)
म्हारा घट मा बिराजता, श्रीनाथजी यमुनाजी महाप्रभुजी, म्हारो मनड़ो है गोकुल वृन्दावन, म्हारे तन रो आंगणियों है तुलसी नवल, म्हारा प्राण जीवन, मारा घट मा

म्हारा घट मा बिराजता, श्रीनाथजी यमुनाजी महाप्रभुजी, म्हारो मनड़ो है गोकुल वृन्दावन, म्हारे तन रो आंगणियों है तुलसी नवल, म्हारा प्राण जीवन, मारा घट मा

तूने सिर पे धरा जो मेरे हाथ, के अब तेरा साथ नहीं छूटे, मेरा तुम पे रहे विश्वास, के अब तेरा साथ नहीं छूटे, तूने

तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो । तुम्ही हो बंधू, सखा तुम्ही हो ॥ तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो । तुम्ही हो बंधू, सखा

तेरी करती रहूं मैं चाकरी, वरदान यही मैं चाहूँ, वरदान यही मैं चाहूँ, वरदान यही मैं चाहूँ, वरदान यही मैं चाहूँ, तेरी करती रहूँ मैं

कैसे भूलूंगा मैया मैं तेरा उपकार, ऋणी रहेगा तेरा, ऋणी रहेगा तेरा हरदम मेरा परिवार, कैसे भूलूँगा मैया मैं तेरा उपकार, कैसे भूलूँगा मैया मैं

मैया आवेगी मैया आवेगी, सांचे मन से याद करोगा, रुक ना पावेगी, मईया आवेगी मईया आवेगी ॥ बुलावे टाबरिया, या दौड़ी आवे है, आंसुड़ा भक्ता

मेरी भक्ति के बदले वचन देना, मुझे झुँझनु में अगला जनम देना ॥ रोज़ मुझे दर पे बुलाती तू रहना, हाथ मेरे सर पे फिराती
