
प्रभु! स्वीकारो मेरे परनाम: भजन (Prabhu Sweekaro Mere Paranam)
सुख-वरण प्रभु, नारायण हे! दु:ख-हरण प्रभु, नारायण हे! तिरलोकपति, दाता, सुखधाम, स्वीकारो मेरे परनाम, स्वीकारो मेरे परनाम, स्वीकारो मेरे परनाम, प्रभु!… मन वाणी में वो

सुख-वरण प्रभु, नारायण हे! दु:ख-हरण प्रभु, नारायण हे! तिरलोकपति, दाता, सुखधाम, स्वीकारो मेरे परनाम, स्वीकारो मेरे परनाम, स्वीकारो मेरे परनाम, प्रभु!… मन वाणी में वो

हरि नाम नहीं तो जीना क्या अमृत है हरि नाम जगत में, इसे छोड़ विषय विष पीना क्या ॥ काल सदा अपने रस डोले, ना

मैं रूप तेरे पर, आशिक हूँ, यह दिल तो तेरा, हुआ दीवाना ठोकर खाई, दुनियाँ में बहुत, मुझे द्वार से, अब न ठुकराना हर तरह

तू प्यार का सागर है, तेरी एक बूँद के प्यासे हम । लौटा जो दिया तूने, चले जायेंगे जहां से हम । तू प्यार का

एक तमन्ना माँ है मेरी, दिल में बसा लूँ सूरत तेरी, हर पल उसी को निहारा करूँ, हर पल उसी को निहारा करूँ, मैया मैया

छोटी सी मेरी पार्वती, शंकर की पूजा करती थी, निर्जल रहकर निश्छल मन से, नित ध्यान प्रभू का धरती थी, छोटी सी मेरी पारवती, शंकर

तुझसा दयालु नहीं प्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे ॥ श्रुति कहे जगत पिता है तू ही प्यारे, बन्यो यशोमति सूत प्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे, तुझसा दयालु
