
सो सतगुरु प्यारा मेरे नाल है – शब्द कीर्तन (So Satguru Pyara Mere Naal Hai)
सो सतगुरु प्यारा मेरे नाल है, जिथे किथे मैनु लै छडाई तिस गुरु कौ हौ वारिया, जिन हर की हर कथा सुनाई, तिस गुरु को

सो सतगुरु प्यारा मेरे नाल है, जिथे किथे मैनु लै छडाई तिस गुरु कौ हौ वारिया, जिन हर की हर कथा सुनाई, तिस गुरु को

गौरी गणेश मनाऊँ, आज सुध लीजे हमारी, गौरी गणेश मनाऊँ, आज सुध लीजे हमारी । सुरहिन गैया को गोबर मनागौं, दिग धर अगना लीपाऊं, आज

बिसर गई सब तात पराई, जब ते साध संगत मोहे पाई, ना कोई बैरी नहीं बेगाना, सगल संग हमको बन आई, बिसर गई सब तात

गौरी के लाड़ले, महिमा तेरी महान, करता है सबसे पहले, पूजा तेरी जहान, गौरी के लाडले, महिमा तेरी महान ॥ चंदन चौकी पे बिराजे, दाता

दूल्हा बने भोलेनाथ जी हमारे, चली बारात गौरा जी के द्वारे, इस दूल्हे पे जग है दीवाना, दीवाना, दूल्हा बने भोलेंनाथ जी हमारे, चली बारात

क्षिप्रा के तट बैठे है, मेरे भोले भंडारी, भोले भंडारी, सबको दर्शन देते है, शिव शम्भू त्रिपुरारी, भोले भंडारी, भोले भंडारी ॥ ये है उज्जैनी

सब मिल कर मंगल गाओ, आज है जगराता, तुम प्रेम से माँ को मनाओ, आज है जगराता ॥ जगराते में देखो गणपति आए है, संग
