ना जी भर के देखा, ना कुछ बात की – भजन (Na Jee Bhar Ke Dekha Naa Kuch Baat Ki)

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ना जी भर के देखा, ना कुछ बात की,
बड़ी आरजू थी, मुलाकात की ।
करो दृष्टि अब तो प्रभु करुना की,
बड़ी आरजू थी, मुलाकात की ॥

गए जब से मथुरा वो मोहन मुरारी,
सभी गोपिया बृज में व्याकुल थी भारी ।
कहा दिन बिताया, कहाँ रात की,
बड़ी आरजू थी, मुलाकात की ॥

चले आयो अब तो ओ प्यारे कन्हिया,
यह सूनी है कुंजन और व्याकुल है गैया ।
सूना दो अब तो इन्हें धुन मुरली की,
बड़ी आरजू थी, मुलाकात की ॥

हम बैठे हैं गम उनका दिल में ही पाले,
भला ऐसे में खुद को कैसे संभाले ।
ना उनकी सुनी ना कुछ अपनी कही,
बड़ी आरजू थी, मुलाकात की ॥

तेरा मुस्कुराना भला कैसे भूलें,
वो कदमन की छैया, वो सावन के झूले ।
ना कोयल की कू कू, ना पपीहा की पी,
बड़ी आरजू थी, मुलाकात की ॥

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तमन्ना यही थी की आएंगे मोहन,
मैं चरणों में वारुंगी तन मन यह जीवन ॥
हाय मेरा यह कैसा बिगड़ा नसीब,
बड़ी आरजू थी, मुलाकात की ॥

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Sandeep Bishnoi

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