गजानन आ जाओ एक बार,
सभा में तुम्हें बुलाते है ॥
सबसे पहले हो तेरी पूजा,
फिर काम बने बाबा दुजा,
हो तेरी पूजा हो हर बार,
सभा में तुम्हें बुलाते है ॥
देवो में देव निराला,
तू माँ गोरा का लाला,
तेरी महिमा अपरम्पार,
सभा में तुम्हें बुलाते है ॥
मैंने तेरा ध्यान लगाया,
तेरा रूप मेरे मन भाया,
करो ख़ुशियों की बौछार,
सभा में तुम्हें बुलाते है ॥
यो अमरहेड़ी त आव,
आनन्द तेरी महिमा गाव,
सबका करदो बेड़ा पर,
सभा में तुम्हें बुलाते है ॥
मंत्र: अलसस्य कुतः विद्या (Alasasya Kutah Vidya)
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 4 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 4)
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गजानन आ जाओ एक बार,
सभा में तुम्हें बुलाते है ॥
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