अलसस्य कुतः विद्या,
अविद्यस्य कुतः धनम्।
अधनस्य कुतः मित्रम्अ,
मित्रस्य कुतः सुखम् ॥
हिन्दी भावार्थ:
आलसी इन्सान को विद्या कहाँ।
विद्याविहीन/अनपढ़/मूर्ख को धन कहाँ।
धनविहीन/निर्धन को मित्र कहाँ।
और मित्रविहीन/अमित्र को सुख कहाँ।
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा (Purushottam Mas Mahatmya Katha)
सभकेर सुधि अहाँ लै छी हे अम्बे - भजन (Sabker Sudhi Aahan Lai Chhi He Ambe)
बांटो बांटो मिठाई मनाओ ख़ुशी - भजन (Banto Banto Mithai Manao Khushi)
Post Views: 304








