
राजा राम आइये, प्रभु राम आइये, मेरे भोजन का, भोग लगाइये: भजन ( Raja Ram Aaiye Mere Bhojan Ka Bhog Lagaiye)
राजा राम आइये, प्रभु राम आइये, मेरे भोजन का, भोग लगाइये ॥ आचमनी अर्घा आरती, यही यहाँ मेहमानी, रुखी रोटी पाओ प्रेम से, पियो नदी

राजा राम आइये, प्रभु राम आइये, मेरे भोजन का, भोग लगाइये ॥ आचमनी अर्घा आरती, यही यहाँ मेहमानी, रुखी रोटी पाओ प्रेम से, पियो नदी

मेरो मन राम ही राम रटे रे, राम ही राम रटे रे ॥ राम नाम जप लीजे प्राणी, कोटिक पाप कटे रे, राम नाम जप

मैं भी बोलूं राम तुम भी बोलो ना, राम है अनमोल मुख को खोलो ना ॥ तू मृत्यु लोक में आया, तुने राम नाम नहीं

सखी री दो कुंवर सुंदर, मनोहर आज आये है, चले दो लाल सजधज कर, ना जाने किसके जाये है, सखी री दो कुँवर सुंदर, मनोहर

जयपुर की चुनरिया, मैं लाई शेरावालिये, जयपुर की चुनरिया, मैं लाई शेरावालिये । आगरा से लहंगा, जयपुर से चुनरिया, दिल्ली के दरीबे से लाई, सितारे

श्लोक: जयंती मंगला काली, भद्र काली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवाधात्री, स्वाहा स्वधा नमोस्तुते । बड़े मान से जमाना, माँ तुमको पूजता है, तेरे नाम का

सभकेर सुधि अहाँ लै छी हे अम्बे हमरा किए बिसरै छी हे थिकहुँ पुत्र अहींकेर जननी से तऽ अहाँ जनै छी हे एहन निष्ठुर किए
