
मुकुट सिर मोर का, मेरे चित चोर का – भजन (Mukut Sir Mor Ka, Mere Chit Chor Ka)
मुकुट सिर मोर का, मेरे चित चोर का । दो नैना सरकार के, कटीले हैं कटार से ॥ कमल लज्जाये तेरे, नैनो को देख के

मुकुट सिर मोर का, मेरे चित चोर का । दो नैना सरकार के, कटीले हैं कटार से ॥ कमल लज्जाये तेरे, नैनो को देख के

होली खेलन आयो श्याम होली खेलन आयो श्याम, आज याहि* रंग में बोरो# री ॥ कोरे-कोरे कलश मँगाओ, रंग केसर को घोरो री । मुख

भगवान कृष्ण के बचपन का निवास ब्रज क्षेत्र यानी मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, गोकुल, नंदगांव और बरसाना होली के लिए भारत मे सबसे अधिक प्रसिद्ध है।

होली एक ऐसा रंगबिरंगा त्योहार है, जिसमे हर धर्म के लोग पूरे उत्साह और मस्ती के साथ रंगों से, मिष्ठानो से, भजनों से जाति बंधन

कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि, री लीला गुदवाय लो प्यारी । दृगन पै लिख दे दीनदयाल नासिका पै लिख दे नन्दलाल कपोलन पै लिख दे

॥ श्याम स्तुति ॥ हाथ जोड़ विनती करूं सुणियों चित्त लगाय, दास आ गयो शरण में रखियो इसकी लाज, धन्य ढूंढारो देश हैं खाटू नगर

“….बोरी मत जाने , वृषभानु की किशोरी छे होरी में तोसो काहु भाँति नही हारेगी लाल तोहे पकर नचावे, गाल गुलचा लगावे तोहे राधिका बानवे,
