
राधे कृष्ण की ज्योति अलोकिक – भजन (Radhe Krishna Ki Jyoti Alokik)
राधे कृष्ण की ज्योति अलोकिक, तीनों लोक में छाये रही है । भक्ति विवश एक प्रेम पुजारिन, फिर भी दीप जलाये रही है । कृष्ण

राधे कृष्ण की ज्योति अलोकिक, तीनों लोक में छाये रही है । भक्ति विवश एक प्रेम पुजारिन, फिर भी दीप जलाये रही है । कृष्ण

कितना प्यारा है सिंगार, की तेरी लेउ नज़र उतार, कितना प्यारा है, ओ हो, कितना प्यारा है सिंगार, की तेरी लेउ नजर उतार, कितना प्यारा

चली जा रही है उमर धीरे धीरे, पल पल यूँ आठों पहर धीरे धीरे, चली जा रही हैं उमर धीरे धीरे, जो करते रहोगे भजन

अनमोल तेरा जीवन, यूँ ही गँवा रहा है, किस ओर तेरी मंजिल, किस ओर जा रहा है, अनमोल तेंरा जीवन, यूँ ही गँवा रहा है

बंसी वाले तेरी बांसुरी कमाल कर गयी, कमाल कर गई जी कमाल कर गई, कमाल कर गई जी कमाल कर गई, मुरली वाले तेरी मुरली

अरज लगावे जी, सांवरिया थासु अरज लगावे जी, म्हारी आंख्या सु नीर बहे, म्हाने हिचक्या आवे जी, याद सतावे जी, सांवरिया थारी याद सतावे जी,

दर पे तुम्हारे सांवरे, सर को झुका दिया, मैंने तुम्हारी याद में, खुद को मिटा दिया, दर पे तुम्हारे साँवरे, सर को झुका दिया ॥
